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अमेरिका–भारत व्यापार समझौता किसानों पर सीधा हमला। जिलाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह खालसा

किसानों व डेयरी सेक्टर के लिए खतरा, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन।

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डोईवाला (राजेंद्र वर्मा):
अमेरिका–भारत व्यापार समझौते के विरोध में भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने डोईवाला में जोरदार विरोध दर्ज कराया। यूनियन के जिलाध्यक्ष सुरेंद्र खालसा के नेतृत्व में किसानों ने उप जिलाधिकारी डोईवाला के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपते हुए इस समझौते को कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और देश की खाद्य सुरक्षा के लिए घातक बताया।

किसानों का कहना है कि अमेरिका में कृषि क्षेत्र को भारी सब्सिडी दी जाती है, जिससे वहां की उपज बेहद सस्ती होती है। यदि ऐसी फसलें भारत में आयात की गईं तो सोयाबीन, मक्का और गेहूं जैसी प्रमुख फसलों के दाम बुरी तरह गिरेंगे, जिससे भारतीय किसान खुले बाजार में टिक नहीं पाएंगे और उनकी आय पर सीधा असर पड़ेगा।

जिलाध्यक्ष सुरेंद्र खालसा ने कहा कि यह समझौता किसानों के भविष्य के साथ खुला खिलवाड़ है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की मोदी सरकार किसान विरोधी नीतियों के तहत कॉरपोरेट कंपनियों के हितों को प्राथमिकता दे रही है, जिसके चलते छोटे और सीमांत किसान लगातार कमजोर होते जा रहे हैं। सस्ती विदेशी उपज से देश की कृषि व्यवस्था पर गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।

ब्लॉक प्रमुख गौरव चौधरी ने कहा कि यूनियन ने ज्ञापन में डेयरी सेक्टर को लेकर भी गहरी चिंता जताई है। अमेरिकी डेयरी उत्पादों के आयात से देश के छोटे दुग्ध उत्पादक किसानों की आजीविका पर संकट आएगा और स्थानीय दुग्ध उद्योग कमजोर होगा।

गन्ना समिति के उपाध्यक्ष हरभजन सिंह ने कहा कि यह समझौता पेटेंट बीजों और बौद्धिक संपदा अधिकारों के जरिए भारतीय कृषि को बहुराष्ट्रीय कॉरपोरेट कंपनियों के नियंत्रण में देने की साजिश है, जिससे किसान अपनी ही खेती पर निर्भर नहीं रह पाएगा।

यूनियन से जुड़े अजीत सिंह प्रिंस ने सरकार से मांग की कि किसानों, डेयरी उत्पादकों और देश की खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस अमेरिका–भारत व्यापार समझौते को तत्काल रद्द किया जाए।

प्रदर्शन में सुरजीत सिंह, विजय बक्सी, अनूप अशोक, हरजीत सिंह, श्याम सिंह, सनावर अली, नरेंद्र सिंह, एसपी सिंह सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।

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