उत्तराखंड किसान सभा ने संगठन विस्तार और आंदोलन पर दिया जोर।
किसान की समस्याओं को लेकर डोईवाला सम्मेलन में हुई विस्तृत चर्चा।
डोईवाला (राजेंद्र वर्मा):
डोईवाला स्थित गन्ना समिति परिसर में उत्तराखंड किसान सभा का सातवां दो दिवसीय राज्य सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे किसान प्रतिनिधियों ने भाग लिया और खेती-किसानी से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। सम्मेलन की अध्यक्षता अखिल भारतीय किसान सभा के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह सजवान ने की।
सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि खेती की बढ़ती लागत, फसलों के उचित दाम न मिलना और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर कम होने से किसान लगातार दबाव में है। किसानों की समस्याएं जमीनी स्तर की हैं, जिनका समाधान भी जमीनी स्तर से ही होना चाहिए।
अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय महामंत्री बीजू कृष्णन ने कहा कि किसान और मजदूर विरोधी नीतियों से असंतोष बढ़ रहा है और जनहित की नीतियों से ही हालात सुधर सकते हैं।
केंद्रीय सदस्य पुष्पेंद्र त्यागी ने कहा कि किसानों से जुड़े मामलों में शासन-प्रशासन को पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ काम करना चाहिए।
संयुक्त किसान मोर्चा के संयोजक ताजेंद्र सिंह ताज ने कहा कि किसानों की एकता ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है और संगठित संघर्ष से ही सरकार पर दबाव बनाया जा सकता है।
गन्ना समिति के उपाध्यक्ष हरभजन सिंह ने कहा कि दिखावटी फैसलों से किसानों को राहत नहीं मिलती, नीतियां बनाते समय किसानों की राय को महत्व दिया जाना चाहिए।
सम्मेलन में संगठन विस्तार और संयुक्त किसान मोर्चा के माध्यम से किसान हितों को लेकर आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया गया। सम्मेलन के प्रथम दिन के समापन पर किसानों से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से किसान हितों की लड़ाई को आगे बढ़ाने का आह्वान किया गया। कार्यक्रम का संचालन याकूब अली ने किया।
इस मौके पर प्रदेश महामंत्री गंगाधर नौटियाल, राजेंद्र नेगी, दलजीत सिंह, मनोज, कमरुद्दीन, इंद्रजीत सिंह, भोपाल सिंह रावत, भगवान सिंह राणा, शिव प्रसाद देवली, बलबीर सिंह, जाहिद अंजुम, सरजीत सिंह, मालकीत सिंह, जसबीर सिंह, अनूप कुमार पाल, समशाद अली, राजा राम सेमवाल, कमलेश गोड़, जागीर सिंह, प्रेम सिंह पाल, बिन्दा सिंह, अवतार सिंह, अय्यूब हसन, पूरण सिंह, हरीश शर्मा सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।



