संत निरंकारी मिशन ने रक्तदान शिविर में 125 यूनिट रक्तदान किया।
निस्वार्थ भाव से श्रद्धालुओं ने किया रक्तदान।।
डोईवाला (राजेंद्र वर्मा):
संत निरंकारी मिशन में आज का दिन भक्ति पर्व के दिवस के रूप में मनाया गया वहीं सत्संग भवन ब्रांच भोगपुर में सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित जी के पावन आशीर्वाद प्रेरणा से भक्ति पर्व के अवसर पर मानवता की सेवा हेतु रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। जिसका उद्घाटन रिबन काटकर मसूरी जोन के जोनल इंचार्ज श्री हरभजन सिंह जी ने किया।
रविवार को संत निरंकारी मिशन द्वारा संत निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन (SNCF) द्वारा रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। जिसके अंतर्गत ब्रांच के सेवादल साध संगत के वॉलिंटियर्स प्रातः 9 बजे से ही रक्तदान करने के लिए लंबी कतारों में खड़े रहे। रक्तदान शिविर में
राजकीय दून हॉस्पिटल देहरादून ब्लड बैंक की टीम द्वारा रक्त संग्रहित किया गया।
ब्लड बैंक के डॉ अंजुम निशान ने बताया की
रक्तदान के इस महाअभियान शिविर में रक्तदान करने के लिए 165 रजिस्ट्रेशन किए गए थे। जांच के उपरांत योग्य पाए गए 125 श्रद्धालु भक्तों ने रक्तदान किया।
जोनल इंचार्ज हरभजन सिंह ने कहा कि संत निरंकारी मिशन रक्तदान के क्षेत्र में सदैव अग्रणी रहा है। बाबा हरदेव सिंह जी का महावाक्य *”रक्त नालियों में नहीं नाड़ियों में बहे”* मानवता की सेवा को दर्शाता है। मानवता की सेवा ही हमारा धर्म है।
प्रत्येक इंसान को रक्तदान करना चाहिए। रक्तदान शिविर समाज की आवश्यकता है। कहा कि एक यूनिट ब्लड से 3 व्यक्तियों को जीवनदान दिया जा सकता है। जिसमें RBC, प्लाज्मा और प्लेटलेट्स को अवश्यकता अनुसार मरीज को देकर जीवन की रक्षा की जा सकती है। 18 से 65 वर्ष के स्वस्थ्य व्यक्ति 90 दिनों के अंतराल पर रक्तदान कर सकता है। रक्तदान करने से हमारे शरीर में किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं होती है। कहा की निरंकारी मिशन पूरे उत्तराखंड में समय-समय पर अलग-अलग ब्रांचो में रक्तदान शिविर लगाकर मानवता की यह सेवा निरंतर करता आ रहा है।
इस अवसर पर सत्संग का आयोजन भी किया गया जिसमें ज्ञान परचारिका सविंदर कौर ने सतगुरु का पावन संदेश भक्तों को प्रदान करते हुए कहा कि भक्ति दिखावे का नाम नहीं समर्पण का नाम है। आज जिन भक्तों को याद किया जाता है उन्होंने ब्रह्मज्ञान को जीवन में उतार कर भक्ति की। भक्ति के लिए सत्संग करना अति अवश्य है। सत्संग करने से मन की मैल को साफ हो जाता है, तभी ये मन परमात्मा के साथ जुड़ जाता है। गुरु के वचनों पर चलकर ही भक्ति की अवस्था को प्राप्त किया जा सकता है।
इस मौके पर ब्रांच मुखी, क्षेत्रीय संचालक, सेवादल के अधिकारी और साथ संगत के सैकड़ो निरंकारी श्रद्धालु , राजकीय दून हॉस्पिटल देहरादून की टीम में डॉ अंजुम निशान, डॉ समष्टि, प्रतिभा सत्याल, प्रीतम सिंह, गणेश गोदियाल, दीपक राणा, हरीश भट्ट, विजय नेगी, चंद्र मोहन बिष्ट, प्रदीप सिंह, आयुष सिंह आदि मौजूद रहे
उपस्थित रहे।



