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टीबी को हराना है तो डर और भेदभाव मिटाना होगा, (हिम्स जौलीग्रांट में विश्व टीबी दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम, छात्रों और डॉक्टरों ने मिलकर दिया संदेश)

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डोईवाला (राजेंद्र वर्मा):
हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (हिम्स) जौलीग्रांट में विश्व टीबी दिवस के उपलक्ष्य में श्वसन चिकित्सा विभाग ने जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें छात्रों और आम लोगों को टीबी के लक्षण, जांच और इलाज के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही इस बीमारी से जुड़े भेदभाव को खत्म करने का संदेश भी दिया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन डीन डॉ. अहमदुल्ला शरीफ और निदेशक (अस्पताल सेवाएं) डॉ. हेम चंद्रा ने किया। इस दौरान नर्सिंग और बीएमएलटी छात्रों ने नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर टीबी मरीजों के साथ होने वाले भेदभाव और उनकी परेशानियों को दिखाया। इसके अलावा अस्पताल में टीबी जांच, फेफड़ों के व्यायाम (पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन) और खानपान संबंधी सलाह के लिए विशेष काउंटर भी लगाए गए। “आशा की दीवार” पर टीबी से ठीक हो चुके मरीजों ने अपने संदेश लिखकर दूसरों को हिम्मत दी। इसके अलावा छात्रों द्वारा बनाए गए पोस्टर भी प्रदर्शित किए गए। डीन डॉ. अहमदुल्ला शरीफ ने कहा कि टीबी का समय पर इलाज संभव है, बस लोगों को जागरूक होना जरूरी है। निदेशक (अस्पताल सेवाएं) डॉ. हेम चंद्रा ने कहा कि टीबी मरीजों को समाज का सहयोग मिलना चाहिए, ताकि वे बिना डर के इलाज करा सकें। विभागाध्यक्ष डॉ. रेखी खंडूरी ने बताया कि अगर किसी को लगातार खांसी, बुखार और वजन कम होना जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत जांच करानी चाहिए। इससे पूर्व एमबीबीएस छात्र-छात्राओं के लिए एक विशेष शिक्षण सत्र आयोजित किया गया। इसमें टीबी के एक वास्तविक मरीज का केस बताया गया, जिसके बाद छात्रों से सवाल-जवाब किए गए। इससे छात्रों को बीमारी को समझने में मदद मिली। इस अवसर पर डॉ. अनुराधा कुसुम, डॉ. सुशांत खंडूरी, डॉ. वरूणा जेठानी, डॉ. मनोज कुमार आदि ने भी टीबी को लेकर लोगों को जगारूक किया।

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