तीन पत्रावलियों में धरनारत सभासदों के साथ हस्ताक्षर, अब अचानक पालिका अध्यक्ष के समर्थन में खड़े दिखे वही चेहरे।
धरने से दगा तक: कुछ सभासदों का यू-टर्न, जनता के सवालों से भागे जनप्रतिनिधि।
डोईवाला (राजेंद्र वर्मा):
नगर पालिका में चल रहे अनिश्चितकालीन धरने के बीच कुछ सभासदों का रुख अचानक बदल जाना अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। जो सभासद अब तक धरने पर बैठे अपने साथियों के समर्थन में खड़े नजर आ रहे थे, वही अब पालिका अध्यक्ष के पक्ष में खुलकर सामने आ गए हैं।
जानकारी के अनुसार धरने से जुड़ी पहली, दूसरी और तीसरी पत्रावली में इन सभी सभासदों के हस्ताक्षर मौजूद हैं, जिनमें पालिका अध्यक्ष पर मनमानी, नियम विरुद्ध फैसले लेने और बोर्ड प्रस्तावों की अनदेखी जैसे गंभीर आरोप दर्ज हैं। इन दस्तावेज़ों में समर्थन देने के बाद अब इनका अचानक बदला रुख कई सवाल खड़े कर रहा है।
धरनारत सभासदों का कहना है कि यह यू-टर्न किसी दबाव या निजी स्वार्थ का परिणाम हो सकता है। उन्होंने कहा कि जिन मुद्दों पर एकजुट होकर संघर्ष शुरू किया गया था, उन्हीं मुद्दों से पीछे हटना जनता के साथ विश्वासघात है।
सभासदों ने यह भी कहा कि नगर की जनता सब देख रही है और समय आने पर ऐसे जनप्रतिनिधियों को जवाब देगी, जो हालात बदलते ही अपना पक्ष बदल लेते हैं। वहीं पालिका अध्यक्ष समर्थक गुट इस बदलाव को “गलतफहमियों का समाधान” बता रहा है, लेकिन पत्रावलियों में दर्ज तथ्यों को झुठलाना उनके लिए आसान नहीं है।
धरना जारी है और अब यह आंदोलन केवल पालिका प्रशासन के खिलाफ ही नहीं, बल्कि यू-टर्न लेने वाले सभासदों की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर रहा है।












