पंजाबी समुदाय ने परंपरागत उल्लास के साथ मनाया लोहड़ी पर्व।
लोकगीत, भांगड़ा और लोहड़ी की अग्नि के साथ बाजारों में भी दिखी जबरदस्त रौनक।
डोईवाला (राजेंद्र वर्मा):
पंजाबी समुदाय का प्रमुख लोकपर्व लोहड़ी क्षेत्र में पूरे उत्साह, श्रद्धा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। शाम होते ही घरों, मोहल्लों और सार्वजनिक स्थलों पर लोहड़ी की पावन अग्नि प्रज्ज्वलित की गई। श्रद्धालुओं ने अग्नि की परिक्रमा कर तिल, गुड़, मूंगफली, रेवड़ी और पॉपकॉर्न अर्पित किए तथा परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
महिलाओं ने पारंपरिक पंजाबी लोकगीत गाए, जबकि युवाओं ने ढोल की थाप पर भांगड़ा कर पर्व का आनंद लिया। नवविवाहित जोड़ों और नवजात शिशुओं वाले परिवारों में लोहड़ी विशेष उत्साह के साथ मनाई गई। बुजुर्गों ने बच्चों और युवाओं को लोहड़ी के सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व की जानकारी दी।
लोहड़ी पर्व के चलते ऋषिकेश रोड, मिल रोड और आसपास के बाजारों में दिनभर चहल-पहल बनी रही। तिल, गुड़, मूंगफली, रेवड़ी, गजक और तिल के लड्डुओं की दुकानों पर जमकर खरीदारी हुई। ठंड के मौसम को देखते हुए ऊनी कपड़ों और घरेलू जरूरत की वस्तुओं की बिक्री में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई।
ऋषिकेश रोड के दुकानदार बसंत भटनागर ने बताया कि लोहड़ी से पहले ही बाजार में ग्राहकों की आवाजाही बढ़ गई थी। पर्व के दिन पारंपरिक खाद्य सामग्री की सबसे अधिक मांग रही, जिससे छोटे व्यापारियों को भी अच्छा लाभ मिला।
मिल रोड के दुकानदार बबलू कश्यप ने कहा कि त्योहार के कारण लोग आवश्यक सामान के साथ-साथ पर्व की तैयारियों के लिए भी खरीदारी करने बाजार पहुंचे। इससे पूरे बाजार में रौनक बनी रही और व्यापार में तेजी आई I
पंजाबी समुदाय से जुड़े सुरेंद्र खालसा ने कहा कि यह पर्व प्रकृति, फसल और मेहनत का सम्मान करने का संदेश देता है तथा समाज में आपसी भाईचारे को मजबूत करता है।
दामन बाली ने कहा कि लोहड़ी पंजाबी संस्कृति की आत्मा है। इसे परिवार और समाज के साथ मनाने से नई पीढ़ी अपनी परंपराओं और संस्कारों से जुड़ी रहती है।
लोहड़ी पर्व ने डोईवाला क्षेत्र में परंपरा, आस्था, सामाजिक एकता और बाजारों की रौनक को एक साथ जीवंत कर दिया।



