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परमात्मा की रजा में जीवन जीना ही सच्ची भक्ति।

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डोईवाला ऋषिकेश (राजेंद्र वर्मा):
सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित जी के आशीर्वाद से गढ़ी श्यामपुर में आयोजित विशाल समागम में चण्डीगढ़ से पहुंचे जोनल इंचार्ज ओ. पी. निरंकारी ने प्रेरणादायक प्रवचन में कहा कि निरंकार की रजा में जीवन जीना ही सच्ची भक्ति है।
संत समागम में भक्तों ने प्रेरणादायक प्रवचनों से आत्मिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का सुखद आनंद प्राप्त किया।

उन्होंने अपने वचनों में फरमाया कि मानव जीवन अनमोल है इसका मूल उद्देश्य ईश्वर को जानकार भक्ति करना है। संत समागम हमें भक्तों के अनमोल वचन सुनने और उन्हें जीवन में अपनाने का अनमोल अवसर देता है। संत सत्य और सत्संग का मार्ग चुनते हैं। सत्संग से आरंभ हुआ जीवन हर पल निरंकार के एहसास को और अधिक दृढ़ करता चला जाता है।
संत आत्ममंथन द्वारा सकारात्मक परिवर्तन लाते हैं और निरंकार को सर्वोपरि मानते हुए सेवा, सुमिरन और सत्संग को जीवन की प्राथमिकता बनाते हैं।
जब जीवन स्वयं संदेश बन जाए और कर्म शब्दों से अधिक बोलें, तभी सच्ची साधना का स्वरूप प्रकट होता है। इसी क्षण में, पूरी चेतन अवस्था के साथ, निरंकार के एहसास में जीना ही वास्तविक जीवन है, क्योंकि भूत और भविष्य माया का रूप हैं। जब मन में यह विश्वास दृढ़ हो जाए कि कल भी दातार की रज़ा थी और आज भी उसकी कृपा है, तो चिंता स्वतः समाप्त हो जाती है और जीवन सहज और संतुलित बन जाता है।
मनमुटाव और द्वेष से दूर रहकर, दूसरों के भावों को समझते हुए, दोषों पर पर्दा डालकर गुणों को अपनाना ही सच्ची भक्ति है।

समागम की सुंदर व्यवस्था निरंकारी सेवादल ने बखूबी निभाई कार्यक्रम में रायवाला, भोगपुर डोईवाला, बालावाला, तीमली, यमकेश्वर, 14 बीघा, 20 बीघा, भनियावाला, ऋषिकेश, विस्थापित, मानसादेवी आस पास क्षेत्रों के सैकड़ों अनुयाई उपस्थित रहे।

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