राष्ट्रीय प्लास्टिक समिट: सर्कुलर इकोनॉमी को गति देने पर उद्योग–अकादमिक मंथन।
सिपेट–फिक्की के संयुक्त सम्मेलन में पुनर्चक्रण, हरित तकनीक, अपशिष्ट प्रबंधन और स्थायी विनिर्माण पर विशेषज्ञों ने रखे सुझाव; सिपेट की नई बिल्डिंग का निरीक्षण भी किया ।
डोईवाला (राजेंद्र वर्मा):
रसायन एवं पेट्रोरसायन विभाग द्वारा सिपेट और फिक्की के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय प्लास्टिक समिट में शनिवार देर रात देशभर के विशेषज्ञ, उद्योग जगत और शोध संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य प्लास्टिक क्षेत्र में पुनर्चक्रण, अपशिष्ट प्रबंधन और चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना, साथ ही उद्योग और अकादमिक संस्थानों के बीच सहयोग की मजबूत राह तैयार करना रहा। कार्यक्रम से पूर्व प्रतिभागियों ने सिपेट देहरादून की नई बिल्डिंग का निरीक्षण भी किया।
मुख्य सत्र को संबोधित करते हुए रसायन एवं पेट्रोरसायन विभाग की सचिव निवेदिता शुक्ला वर्मा ने कहा कि कार्बन कैप्चर एवं उपयोग, हरित भारत मिशन, बायोप्लास्टिक नीति, मज़बूत ईपीआर ढाँचा और ‘वेस्ट टू वेल्थ’ जैसी पहलें देश में प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन को नई दिशा दे रही हैं। उन्होंने सिपेट और भारतीय पेट्रोलियम संस्थान की भूमिका को हरित तकनीक और सर्कुलर इकोनॉमी को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण बताते हुए उद्योगों से नवाचार आधारित पुनर्चक्रण समाधानों को अपनाने की अपील की।
सम्मेलन में विशेषज्ञों ने टिकाऊ विनिर्माण, अपशिष्ट से ऊर्जा एवं उपयोगी उत्पाद निर्माण, पुनर्चक्रण क्षमता बढ़ाने, और जिम्मेदार उत्पादन व्यवस्था सुदृढ़ करने जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। प्रतिभागियों का कहना था कि ऐसे मंच नीति–निर्माताओं, शोध संस्थानों और उद्योग जगत के बीच समन्वय को मजबूती प्रदान करते हैं तथा भारत को हरित और प्रतिस्पर्धी पेट्रोकेमिकल क्षेत्र की ओर तेजी से आगे ले जाते हैं।
कार्यक्रम में डीसीपीसी संयुक्त सचिव दीपक मिश्रा, फिक्की पेट्रोकेमिकल्स एवं प्लास्टिक समिति अध्यक्ष प्रभा दास, एआईपीएमए अध्यक्ष अरविंद मेहता, सिपेट महानिदेशक प्रो. शिशिर सिन्हा, बीसीजी पार्टनर नितेश शर्मा, फिक्की महिला संगठन उत्तराखंड अध्यक्ष गीता खन्ना, सिपेट देहरादून निदेशक डॉ. प्रताप चंद पाढ़ी, तकनीकी अधिकारी पंकज फुलारा, व्याख्याता समीर पुरी और तकनीकी अधिकारी पार्थ सारथी दास सहित कई विशेषज्ञ मौजूद रहे।



