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बेमौसम बारिश ने उजाड़ी गेहूं की फसल, किसानों की मेहनत पर फिरा पानी, (खेतों में गिरा गेहूं, दाने अंकुरित होने का खतरा; मुआवजे की मांग तेज)

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डोईवाला (राजेंद्र वर्मा):
क्षेत्र में लगातार हो रही बेमौसम बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है। बीते दिनों हुई बारिश से जहां खेतों में खड़ी गेहूं की फसल गिर गई थी, वहीं मंगलवार रात से शुरू हुई तेज बारिश ने गिरी हुई फसल को और अधिक नुकसान पहुंचा दिया। खेतों में पानी भरने और अत्यधिक नमी के कारण दाने अंकुरित होने का खतरा बढ़ गया है, जिससे उत्पादन के साथ-साथ गुणवत्ता पर भी गंभीर असर पड़ने की आशंका है।

किसानों का कहना है कि इस समय गेहूं की फसल पूरी तरह पककर कटाई के लिए तैयार थी। अचानक बदले मौसम ने महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया। कई गांवों में गेहूं की फसल पूरी तरह चौपट हो चुकी है, वहीं दलदली खेतों के कारण कटाई कार्य भी प्रभावित हो रहा है। यदि मौसम जल्द साफ नहीं हुआ तो नुकसान और बढ़ने की आशंका है।

भारतीय किसान यूनियन टिकैत के जिला अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह खालसा ने कहा कि बेमौसम बारिश से किसानों को भारी आर्थिक क्षति हुई है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल फसल नुकसान का सर्वे कराने, वास्तविक आकलन के आधार पर मुआवजा तय करने और प्रभावित किसानों को शीघ्र राहत देने की मांग की।

मारखम ग्रांट के प्रधान परविंदर सिंह बाउ ने बताया कि क्षेत्र के अधिकांश किसानों की गेहूं की फसल जमीन पर गिर चुकी है। लगातार बारिश से फसल सड़ने का खतरा बना हुआ है। उन्होंने प्रशासन से विशेष सर्वे टीम भेजकर नुकसान का आंकलन कराने और राहत पैकेज घोषित करने की मांग की।

किसान दरपान बोरा ने बताया कि इस बार फसल अच्छी होने की उम्मीद थी, लेकिन बारिश ने सब कुछ बिगाड़ दिया। खेतों में पानी भरा है, दाने काले पड़ने लगे हैं। अगर तुरंत मदद नहीं मिली तो अगली फसल की तैयारी भी मुश्किल हो जाएगी।

किसान सुरेंद्र सिंह राणा का कहना है कि खाद, बीज और मजदूरी की लागत पहले ही बहुत बढ़ चुकी है। अब फसल खराब होने से कर्ज का बोझ और बढ़ेगा। सरकार को तुरंत सर्वे कराकर मुआवजा देना चाहिए।
किसानों का कहना है कि पहले से ही बढ़ती लागत और कम समर्थन मूल्य के कारण वे परेशान हैं। ऐसे में बेमौसम बारिश ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है। मौसम विभाग द्वारा आगे भी बारिश की संभावना जताए जाने से क्षेत्र के किसान बेहद चिंतित नजर आ रहे हैं।

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