Blog

ब्रेन कनेक्ट 2026: शोध और इलाज के बीच की दूरी मिटाने को वैज्ञानिकों का मंथन, (हिम्स जौलीग्रांट में राष्ट्रीय न्यूरोसाइंस संगोष्ठी, देशभर के विशेषज्ञों ने ट्रांसलेशनल रिसर्च पर दिया जोर)

खबर को सुनें

डोईवाला (राजेंद्र वर्मा):
स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय (एसआरएचयू) के हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (हिम्स), जौलीग्रांट में ‘ब्रेन कनेक्ट-2026’ राष्ट्रीय न्यूरोसाइंस संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम इंटरनेशनल ब्रेन अवेयरनेस वीक के तहत आयोजित हुआ, जिसमें देशभर के प्रमुख वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने भाग लिया। संगोष्ठी में न्यूरोसाइंस शोध और क्लिनिकल प्रैक्टिस के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया।

आदि कैलाश सभागार में इंडियन एकेडमी ऑफ न्यूरोसाइंसेस (आईएएन) के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. स्वामी राम के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।

हिम्स जौलीग्रांट में न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. दीपक गोयल ने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्यों में न्यूरोलॉजिकल रोगों के अध्ययन और उपचार की व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने इस प्रकार के शैक्षणिक और शोध मंचों को स्वास्थ्य सेवाओं के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।

आईएएन के अध्यक्ष डॉ. विनय कुमार खन्ना ने कहा कि भारत में न्यूरोसाइंस के क्षेत्र में तेजी से प्रगति हो रही है, लेकिन इसे क्लिनिकल प्रैक्टिस से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

पूर्व महानिदेशक, डीआरडीओ, डॉ. शशि बाला सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि मस्तिष्क अनुसंधान भविष्य की स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा तय करेगा और ऐसे आयोजन युवा वैज्ञानिकों को प्रेरित करने के साथ नवाचार को बढ़ावा देते हैं।

एनबीआरसी, मनेसर (गुरुग्राम) के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं आईएएन सचिव डॉ. पंकज सेठ ने कहा कि ट्रांसलेशनल न्यूरोसाइंस के माध्यम से ही जटिल न्यूरोलॉजिकल रोगों के प्रभावी समाधान संभव हैं।

निमहंस, बेंगलुरु की डॉ. फाल्गुनी अल्लादी ने बहु-विषयक सहयोग को न्यूरोसाइंस के भविष्य की कुंजी बताते हुए कहा कि ऐसे मंच इस सहयोग को मजबूत करते हैं। वहीं, बीएचयू के डॉ. रजनीकांत मिश्रा ने शोध और क्लिनिकल अनुभव के एकीकरण को बेहतर उपचार पद्धतियों के लिए आवश्यक बताया।

आयोजन समिति की सदस्य डॉ. कंचन बिष्ट ने बताया कि ‘ब्रेन कनेक्ट’ का उद्देश्य प्रयोगशाला में हो रहे शोध और मरीजों की देखभाल के बीच की खाई को पाटना है।

डॉ. कौशिक प्रमोद शर्मा ने जानकारी दी कि संगोष्ठी में आईआईटी मद्रास, आईआईटी रुड़की, बीएचयू, सेंटर फॉर ब्रेन रिसर्च, नेशनल ब्रेन रिसर्च सेंटर (एनबीआरसी), जेएनयू, जीआईटीएएम यूनिवर्सिटी, कुमाऊं यूनिवर्सिटी और सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ हिमाचल प्रदेश सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों की सक्रिय भागीदारी रही।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button