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वन्य प्राणियों की रोकथाम के नाम पर 3 करोड़ 57 लाख रुपए की लागत से बन रही सुरक्षा दीवार में बड़ा खेल।

बुल्लावाला में मानकों को दरकिनार कर सुसवा नदी की खनन सामग्री से हो रहा निर्माण, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का लीपा-पोती आरोप।

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डोईवाला (राजेंद्र वर्मा):
बुल्लावाला क्षेत्र में वन्य प्राणियों की आवाजाही रोकने, किसानों और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से करीब 3 करोड़ 57 लाख रुपये की लागत से बनाई जा रही सुरक्षा दीवार अब विवादों में घिरती नजर आ रही है। सुरक्षा दीवार का कार्य लोक निर्माण विभाग द्वारा किया जा रहा है,स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य में निर्धारित मानकों की अनदेखी की जा रही है और स्वीकृत सामग्री की जगह बुल्लावाला स्थित सुसवा नदी से लाई गई घटिया खनन सामग्री का उपयोग किया जा रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि सुरक्षा दीवार जैसे महत्वपूर्ण निर्माण में मजबूती पर ध्यान देने के बजाय केवल ऊपरी लीपा-पोती कर काम पूरा दिखाने की औपचारिकता निभाई जा रही है। लोगों को आशंका है कि पहली ही तेज बरसात में दीवार की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है, जिससे न केवल सरकारी धन की बर्बादी होगी बल्कि वन्य प्राणियों से सुरक्षा का उद्देश्य भी अधूरा रह जाएगा।
बताया जा रहा है कि यह सुरक्षा दीवार क्षेत्र में हाथी, नीलगाय सहित अन्य वन्य प्राणियों की आवाजाही रोकने के लिए बनाई जा रही है, ताकि ग्रामीण आबादी और किसानों की फसलों को नुकसान से बचाया जा सके। लेकिन घटिया सामग्री और मानकों की अनदेखी के चलते यह दीवार खुद ग्रामीणों के लिए खतरा बन सकती है।
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डोईवाला ब्लॉक प्रमुख गौरव चौधरी ने निर्माण कार्य पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि“वन्य प्राणियों की रोकथाम के लिए बनाई जा रही सुरक्षा दीवार में अगर मानकों के अनुरूप कार्य नहीं हुआ तो यह जनता के साथ धोखा है। तीन करोड़ 57 लाख रुपये की योजना में गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए। पूरे मामले की तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए।

कांग्रेस नेता रणजीत सिंह बॉबी ने विभाग को घेरते हुए कहा कि सुसवा नदी की खनन सामग्री मानकों के अनुरूप नहीं है, इसके बावजूद उसका उपयोग किया जा रहा है। यह सीधा सरकारी धन का दुरुपयोग है। यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर आंदोलन करेगी।

तीन करोड़ 57 लाख रुपये की लागत और जनसुरक्षा से जुड़ी इस योजना में मानकों की अनदेखी और निर्माण गुणवत्ता पर उठ रहे सवालों के बावजूद संबंधित विभागों और प्रशासन की चुप्पी लोगों में नाराजगी पैदा कर रही है। अब क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि प्रशासन निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई करेगा, ताकि सुरक्षा दीवार अपने वास्तविक उद्देश्य को पूरा कर सके।

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