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वंदे मातरम आजादी का गीत है जिसने भारतीय जनमानस में स्वतंत्रता की अलख को जगाया था। नेगी

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डोईवाला (राजेंद्र वर्मा):
संविधान दिवस एवं वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण हो जाने पर विद्यालयों में वंदे मातरम का सामूहिक गान किया गया। वक्ताओं ने राष्ट्रगीत की महत्ता को बताने के साथ संविधान को भारत के आम आदमी का सुरक्षा कवच बताया। बुधवार को पब्लिक इंटर कॉलेज में छात्र-छात्राओं ने पूर्ण वंदे मातरम का गान किया ।छात्रा गिरिजा, आरूशा परवीन ने वंदे मातरम का हिंदी अर्थ बताया ।मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे नगर पालिका अध्यक्ष नरेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि वंदे मातरम आजादी का गीत है जिसने भारतीय जनमानस में स्वतंत्रता की अलख को जगाया था। विद्यालय प्रबंधक मनोज नौटियाल ने कहा कि संविधान हमारे मौलिक अधिकारों की रक्षा करने के साथ संपूर्ण आज़ादी का दस्तावेज है। प्रधानाचार्य अंकित डोबरियाल और शिक्षक अश्वनी गुप्ता ने भी वंदे मातरम और संविधान की व्याख्या पर विस्तार से प्रकाश डाला। आयोजित पोस्टर प्रतियोगिता में कक्षा 10 की अंजू को प्रथम स्थान मिला। इससे पूर्व संविधान निर्माता डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के चित्र पर पुष्प चढ़कर उनका भावपूर्ण स्मरण किया गया। इस अवसर पर विद्यालय प्रबंध समिति के ईश्वर चंद पाल, सभासद सुरेश सैनी, विमला नैथानी, रजत ईष्टवाल, के अलावा भुवनेश वर्मा, ओमप्रकाश काला, विवेक बधानी, तेजवीर सिंह, साक्षी सुंदरियाल, सुदेश सहगल, पूजा जोशी, किरण बिष्ट, श्यामानंद, राधा गुप्ता, चारू वर्मा, अर्चना पाल, मोनिका, राजीव कंडवाल, चेतन प्रसाद कोठारी, मयंक शर्मा, उदय सिंह पाल आदि मुख्य रूप से मौजूद थे ।कार्यक्रम का संचालन शिक्षक अश्वनी गुप्ता ने किया।

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