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अंतरराष्ट्रीय क्लीनिकल ट्रायल्स दिवस पर हिम्स जौलीग्रांट में युवा शोधकर्ताओं को मिला मंच, (पोस्टर प्रतियोगिता, जागरूकता सत्र और रोल प्ले के माध्यम से विद्यार्थियों को दी गई क्लीनिकल रिसर्च की व्यावहारिक जानकारी)

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डोईवाला (राजेंद्र वर्मा)
हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (हिम्स) जौलीग्रांट में अंतरराष्ट्रीय क्लीनिकल ट्रायल्स दिवस के अवसर पर विभिन्न शैक्षणिक एवं जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर क्लीनिकल रिसर्च में सहयोग, नवाचार और रोगी-केंद्रित चिकित्सा को बढ़ावा देना रहा।
क्लीनिकल रिसर्च विभाग की ओर से सुश्रुत लेक्चर थियेटर में आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि हिम्स के डीन डॉ. ए. शरीफ ने कहा कि चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में क्लीनिकल रिसर्च नई संभावनाओं के द्वार खोल रही है। उन्होंने विद्यार्थियों को शोध कार्यों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण रिसर्च ही भविष्य की बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की आधारशिला है। विभागाध्यक्ष डॉ. निक्कू यादव ने कहा कि आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं और नई दवाओं के विकास में क्लीनिकल रिसर्च की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को शोध एवं चिकित्सा विज्ञान के नए आयामों से परिचित कराते हैं और उन्हें अनुसंधान के प्रति प्रेरित करते हैं।
कार्यक्रम में एमएससी क्लीनिकल रिसर्च के विद्यार्थियों के लिए पोस्टर प्रेजेंटेशन प्रतियोगिता आयोजित की गयी। प्रतियोगिता में टीम एच के हसनैन एवं रजनी सैनी ने “वैश्विक एडवांस्ड ट्रायल्स में जोखिम आधारित रोगी मॉनिटरिंग” विषय पर प्रथम स्थान प्राप्त किया। वहीं टीम एफ की साधना मिश्रा एवं रुचिका ने “सीएआर-टी सेल थेरेपी विदाउट बॉर्डर्स” विषय पर प्रस्तुति देकर दूसरा स्थान हासिल किया। इसके अलावा “दवा खोज एवं विकास प्रक्रिया में क्लीनिकल रिसर्च की भूमिका” विषय पर जागरूकता सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों को क्लीनिकल रिसर्च की उपयोगिता और आधुनिक चिकित्सा में उसकी भूमिका के बारे में जानकारी दी गई। इस अवसर पर पूर्व छात्रा एवं आईक्यूवीआईए आरडीएस लिमिटेड मुंबई में कार्यरत अर्पिता बोरगांवकर ने विद्यार्थियों को क्लीनिकल रिसर्च के क्षेत्र में उपलब्ध करियर अवसरों से अवगत कराया। प्रतियोगिता का मूल्यांकन डॉ. डी.सी. धस्माना, डॉ. अनुराधा कुसुम, डॉ. रविंदर सैनी, डॉ. रुचि जुयाल, डॉ. किरण भट्ट, डॉ. आरती कोटवाल, डॉ. दीप शिखा एवं डॉ. विदिशा वल्लभ ने किया। निर्णायकों ने विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें भविष्य में और बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित किया।

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