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हिम्स जौलीग्रांट में गुड क्लिनिकल प्रैक्टिस पर पाँच सप्ताह का प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न, 30 प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र।

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डोईवाला (राजेंद्र वर्मा):
हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (हिम्स) जौलीग्रांट के क्लिनिकल रिसर्च विभाग द्वारा गुड क्लिनिकल प्रैक्टिस (जीसीपी) और मेडिकल एथिक्स विषय पर आयोजित पाँच सप्ताह का प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। इस दौरान 30 प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।
बी.सी. रॉय सभागार में आयोजित समापन कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन और गुरु वंदना के साथ हुई। मुख्य अतिथि डीन हिम्स डॉ. अहमदुल्ला शरीफ ने कहा कि अच्छी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए गुड क्लिनिकल प्रैक्टिस, मेडिकल एथिक्स, सही शोध पद्धति और नियमों का पालन बहुत जरूरी है। उन्होंने बताया कि जीसीपी के नियमों का पालन करने से मरीजों की सुरक्षा बनी रहती है और शोध के परिणाम विश्वसनीय होते हैं।
महानिदेशक (शैक्षणिक विकास) डॉ. विजेन्दर चौहान ने कहा स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय एक स्वास्थ्य केंद्रित विश्वविद्यालय है और वैज्ञानिक व नैतिक मानकों के अनुरूप शोध को बढ़ावा देना उसकी जिम्मेदारी है।
क्लिनिकल रिसर्च विभागाध्यक्ष डॉ. निक्कू यादव ने बताया कि इस प्रशिक्षण का उद्देश्य स्वास्थ्य शोध की गुणवत्ता को बेहतर बनाना और प्रतिभागियों को व्यावहारिक ज्ञान देना था। उन्होने बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम क्लिनिकल रिसर्च विभाग द्वारा स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से आयोजित किया गया। पाँच सप्ताह के इस प्रशिक्षण में कुल 137 घंटे की पढ़ाई और प्रायोगिक सत्र शामिल थे। इसमें गुड क्लिनिकल प्रैक्टिस, चिकित्सा नैतिकता, नियामक ढांचा, शोध पद्धति और उन्नत सांख्यिकीय सॉफ्टवेयर के उपयोग की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में अकादमिक और उद्योग जगत के विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन किया। इस अवसर पर डॉ. किरण भट्ट, डॉ. संजय गुप्ता, डॉ. प्रमोद कुमार, डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, डॉ. योगेन्द्र सिंह, डॉ. अमजद हुसैन, डॉ. विकास जाडौन, डॉ. अंकित बत्रा और डॉ. राजीव बिजल्वान सहित कई वरिष्ठ चिकित्सक और अधिकारी उपस्थित रहे।

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