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रामलीला में उमड़ा आस्था और भावनाओं का सैलाब, भरत–कैकयी संवाद और केवट प्रसंग बने आकर्षण का केंद्र।

रामभक्ति, त्याग और करुणा का अद्भुत मिलन,अठूरवाला की रामलीला ने छुआ हर हृदय की गहराई।

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डोईवाला (राजेंद्र वर्मा):
अठूरवाला सांस्कृतिक मंच समिति द्वारा आयोजित प्रथम भव्य रामलीला का पांचवां दिन मंगलवार की रात्रि भक्ति, त्याग और संवेदना का जीवंत मंच बन गया। मंच पर प्रस्तुत भरत–कैकयी संवाद और केवट प्रसंग ने दर्शकों के हृदयों में भावनाओं का सैलाब ला दिया। रामलीला का शुभारंभ हरिद्वार राजराजेश्वरी जगतगुरु शंकराचार्य महाराज और प्रदेश महामंत्री दीप्ति रावत ने दीप प्रज्वलित और पूजा अर्चना कर किया।
शंकराचार्य महाराज ने कहा कि रामायण केवल कथा नहीं, बल्कि जीवन जीने का आदर्श है,जहाँ हर पात्र एक प्रेरणा है।
प्रदेश महामंत्री दीप्ति रावत ने कहा कि अठूरवाला की रामलीला हमारी संस्कृति और भक्ति की जीवंत मिसाल है, जिसने जनमानस को एक सूत्र में जोड़ा है।
भरत और माता कैकयी का संवाद मंच का सबसे भावनात्मक क्षण रहा। जब भरत ने अश्रुपूर्ण नेत्रों से कह कि माता, आपने जो किया, वह राज नहीं, मेरे जीवन का वनवास है, तो पूरा पंडाल सन्नाटे में डूब गया। दर्शकों की आंखें भर आईं और मंचन के अंत में तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा वातावरण गूंज उठा।
इसके बाद मंचित केवट प्रसंग ने कथा को भक्ति के चरम पर पहुँचा दिया। जब केवट ने प्रभु श्रीराम के चरण धोकर अपने माथे से लगाए, तो पूरा मंच भक्ति और प्रेम से आलोकित हो गया।
उस दृश्य ने दर्शाया कि ईश्वर का साक्षात्कार धन या बल से नहीं, सच्चे समर्पण से होता है।
डॉ. ममता कुंवर के कुशल निर्देशन में हो रही इस रामलीला ने अभिनय और भावना दोनों का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि हर दिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुँच रहे हैं। यह रामलीला केवल मंचन नहीं, बल्कि समाज में आस्था और संस्कारों की जागृति का प्रतीक बन चुकी है।
इस मौके पर समिति अध्यक्ष पुरुषोत्तम डोभाल, महामंत्री करतार नेगी, सुरेंद्र सिंह नेगी,सुमेर सिंह नेगी, राजेश कुंवर, कमल सिंह राणा,दीपक नेगी, जसवंत सिंह, रणजीत सिंह, विजय प्रकाश कोठियाल,केंद्रपाल तोपवाल, बालेंद्र सजवान आदि मौजूद रहे। Verma

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