मानव–वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए प्रोजेक्ट “सह-जीवन” की शुरुआत।
डोईवाला (राजेंद्र वर्मा):
लच्छीवाला रेंज के अंतर्गत मानव–वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए प्रोजेक्ट “सह-जीवन” की शुरुआत की गई है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य वन्यजीवों और मानव के बीच सामंजस्य स्थापित करना, टकराव को कम करना तथा वन क्षेत्र से सटे इलाकों में रहने वाले लोगों को वन्यजीव–संवेदनशील क्षेत्रों में समझदारी से जीवन जीने के लिए जागरूक करना है।
वन क्षेत्राधिकारी मेधावी कीर्ति ने बताया की लच्छीवाला रेंज एक महत्वपूर्ण वन क्षेत्र है, जहाँ हाथी, तेंदुआ, हिरण सहित अनेक वन्यजीवों की प्राकृतिक आवाजाही रहती है। मानवीय गतिविधियों के विस्तार, कचरे, खुले भोजन स्रोतों और जागरूकता की कमी के कारण मानव–वन्यजीव संघर्ष की संभावनाएँ बढ़ जाती हैं। परियोजना “सह-जीवन” इन्हीं चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करती है।
परियोजना “सह -जीवन” के प्रमुख उद्देश्य इस प्रकार है
मानव–वन्यजीव संघर्ष को रोकना एवं न्यूनतम करना।
स्थानीय समुदाय, राहगीरों और पर्यटकों को जागरूक करना।
वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार और उनके आवास के प्रति सम्मान विकसित करना।
सुरक्षित, जिम्मेदार और सह–अस्तित्व आधारित जीवनशैली को बढ़ावा देना।
जागरूकता अभियान के अंतर्गत नागरिकों से अपील:
वन क्षेत्र एवं उसके आसपास कचरा, विशेषकर भोजन और प्लास्टिक न फेंकें।
रात के समय अनावश्यक आवाज़, तेज़ रोशनी और तेज़ वाहन गति से बचें।
वन्यजीव दिखने पर उनसे दूरी बनाए रखें, उन्हें भोजन न दें।
खुले में खाने–पीने की वस्तुएँ और कचरा न छोड़ें।
वन विभाग द्वारा जारी दिशा–निर्देशों का पालन करें।
प्रोजेक्ट “सह -जीवन” यह संदेश देती है कि वन्यजीव समस्या नहीं, बल्कि हमारी प्राकृतिक विरासत हैं। यदि हम समझदारी, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करें, तो मानव और वन्यजीव सुरक्षित रूप से साथ–साथ रह सकते हैं। सुरक्षा हेतु ड्रोन द्वारा सर्विलांस, सेंसर्स को भी संवेदनशील क्षेत्रों ट्रायल हेतु प्लांट किया जा रहा है और एक नई रणनीति तैयार की रही है जिससे क्षेत्र में मानव वन्यजीव संघर्षों को न्यूनीकरण किया जा सके।
यह पहल एक सुरक्षित पर्यावरण, संरक्षित वन्यजीव और शांतिपूर्ण सह–अस्तित्व की दिशा में एक सार्थक कदम है।
“सह-जीवन – समझदारी से जीना, प्रकृति के साथ जीना”!



