शहीदी समागम में बच्चों ने सीखी दस्तार की मर्यादा, संस्कारों से जुड़ रही नई पीढ़ी।
दस्तारबंदी व दुमाला प्रतियोगिता के जरिए सिख विरासत से रूबरू हुए बच्चे, मकर संक्रांति पर समापन।
डोईवाला (राजेंद्र वर्मा):
गुरुद्वारा दशमेश दरबार चाली मुक्ते फतेहपुर टांडा में आयोजित शहीदी समागम के दौरान बच्चों के लिए कराई गई दस्तारबंदी एवं दुमाला प्रतियोगिता आकर्षण का केंद्र रही। इस आयोजन ने न केवल धार्मिक वातावरण को और सुदृढ़ किया, बल्कि बच्चों को सिख परंपराओं और अनुशासन के महत्व से भी परिचित कराया।
प्रतियोगिता में 25 बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और दस्तार सजाने की कला के साथ अपनी आस्था और संस्कारों का परिचय दिया। संत बाबा कुलदीप सिंह जी छाउनीवाला (पांवटा साहिब, हिमाचल प्रदेश) के सान्निध्य में सभी प्रतिभागियों को सिरोपा एवं नगद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। सम्मान पाकर बच्चों के चेहरे पर आत्मविश्वास और गर्व साफ झलकता नजर आया।
गुरुद्वारा प्रधान साहब सिंह ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन बच्चों को धर्म, संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने बताया कि गुरुद्वारा केवल धार्मिक आस्था का स्थान नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों की शिक्षा देने का केंद्र भी है।
गुरुद्वारा प्रबंधन समिति से जुड़े राजकुमार राज ने कहा कि शहीदी समागम के जरिए शहीदों की शहादत के साथ-साथ सिख इतिहास और पहचान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। दस्तारबंदी प्रतियोगिता बच्चों में आत्मसम्मान और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करती है।
आयोजकों ने बताया कि शहीदी समागम का समापन मकर संक्रांति के अवसर पर धार्मिक कार्यक्रमों और संगत की उपस्थिति के साथ श्रद्धा व उल्लासपूर्वक किया जाएगा।



