मोटे अनाजों से बने उत्पादों और बेकरी यूनिट ने बदली दूधली की महिलाओं की तकदीर, स्वरोजगार की मिसाल बना आस्था स्वयं सहायता समूह
डोईवाला (राजेंद्र वर्मा):
ग्राम दूधली, विकासखंड डोईवाला में आस्था स्वयं सहायता समूह की महिलाएं स्वरोजगार को धरातल पर उतारते हुए आत्मनिर्भरता की सशक्त कहानी लिख रही हैं। मोटे अनाजों से बने पौष्टिक नमकीन, बिस्कुट और अन्य खाद्य उत्पादों के माध्यम से महिलाएं न केवल स्वयं का रोजगार सृजित कर रही हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रही हैं।
स्वरोजगार मिशन के तहत समूह द्वारा स्थापित बेकरी यूनिट इस पहल का प्रमुख केंद्र बन गई है। यहां स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए मिलेट्स आधारित उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें स्थानीय बाजार में अच्छी पहचान और मांग मिल रही है। वर्तमान में इस यूनिट से आठ महिलाएं नियमित रूप से जुड़ी हुई हैं, जो अपने कौशल के बल पर परिवार की आय बढ़ा रही हैं। समूह का उद्देश्य आने वाले समय में अधिक से अधिक महिलाओं को इससे जोड़कर गांव में ही स्थायी रोजगार उपलब्ध कराना है।
आस्था स्वयं सहायता समूह और बेकरी अध्यक्ष मधु देवी ने बताया कि स्वरोजगार मिशन से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है। मोटे अनाजों से बने उत्पाद स्वास्थ्यवर्धक होने के साथ-साथ बाजार की जरूरतों के अनुरूप हैं। बेकरी यूनिट शुरू होने से उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी हुई है और महिलाओं को नियमित आमदनी का साधन मिला है। उन्होंने कहा कि समूह द्वारा गुणवत्ता, स्वच्छता और पौष्टिकता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि उपभोक्ताओं तक शुद्ध और भरोसेमंद उत्पाद पहुंच सकें।
डोईवाला ब्लॉक प्रमुख गौरव चौधरी ने आस्था स्वयं सहायता समूह के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल स्वरोजगार मिशन के उद्देश्य को साकार करती है। उन्होंने कहा कि महिलाओं द्वारा किया जा रहा यह कार्य महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण स्वरोजगार का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो अन्य गांवों की महिलाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगा।
आस्था स्वयं सहायता समूह की यह सफलता कहानी बताती है कि सही नीति, मेहनत और सामूहिक प्रयास से ग्रामीण महिलाएं स्वरोजगार के माध्यम से सम्मानजनक आजीविका अर्जित कर सकती हैं और आत्मनिर्भर भारत की नींव मजबूत कर सकती हैं।



