अठूरवाला में विस्थापन का ज़ख्म फिर हरा—एयरपोर्ट विस्तार के खिलाफ उठी तीखी आवाज़।
ग्रामीण बोले—अबकी बार बिना लिखित समाधान पीछे नहीं हटेंगे।
डोईवाला (राजेंद्र वर्मा):
एयरपोर्ट विस्तारीकरण के चलते अठूरवाला क्षेत्र एक बार फिर उथल-पुथल में है। अठूरवाला संघर्ष समिति की अगुवाई में ग्रामीण कई दिनों से धरने पर बैठे हैं। उनका कहना है कि विस्तारीकरण की जद में आने वाले 120 परिवार तीसरी बार विस्थापन के दर्द से गुजरने को मजबूर हैं। लोगों में भारी रोष है और गांव में माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है।
धरने पर बैठे ग्रामीणों का आरोप है कि वे पहले भी दो बार सरकारी परियोजनाओं के नाम पर उजड़ चुके हैं और अब एक बार फिर अपने घर-परिवार और भविष्य को लेकर असुरक्षा की स्थिति में पहुंच गए हैं। ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा है कि इस बार बिना लिखित, ठोस और अंतिम समाधान के वे एक कदम भी पीछे नहीं हटेंगे।
ग्रामीणों की सबसे बड़ी और अडिग मांग “जमीन के बदले जमीन” है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि किसी भी कीमत पर केवल मुआवजा स्वीकार नहीं किया जाएगा। साथ ही उनकी मांग है कि सर्किल रेट पूरे क्षेत्र में एक समान लागू किए जाएं, ताकि किसी भी परिवार के साथ आर्थिक भेदभाव न हो।
अठूरवाला संघर्ष समिति के अध्यक्ष मनजीत सजवान ने कहा कि 120 परिवार तीसरी बार उजड़ने की कगार पर खड़े हैं। यह सिर्फ जमीन का नहीं बल्कि अस्तित्व, घर, और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा का सवाल है। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार लिखित रूप में स्पष्ट समाधान नहीं देती, तब तक धरना बदस्तूर जारी रहेगा। बार-बार उजड़ना किसी भी परिवार के लिए सबसे बड़ा अन्याय है, और हम अब इसे स्वीकार नहीं करेंगे I
उन्होंने यह भी बताया कि पहले के विस्थापनों ने इन परिवारों को सामाजिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर गहरी चोट पहुंचाई है, इसी कारण मजबूरी में यह आंदोलन शुरू करना पड़ा है।
धरना स्थल पर अमित सजवान, रमेश सजवान, बबीता तडियाल, रेखा देवी, सिरा सजवान, हुकम सिंह पवार, खेम सिंह सजवान, सुशीला देवी, आशा देवी, अंजू सजवान, विमला सजवान, उर्मिला देवी, रमेश सजवान सहित अनेक ग्रामीण मौजूद रहे।



