प्रकाश पर्व पर गुरुवाणी और सेवा भाव से गूंजा भनियावाला–नुन्नावाला गुरुद्वारा।
गुरु साहिब की शिक्षाएं नशामुक्त, अनुशासित और सेवा-प्रधान समाज के निर्माण की देती है प्रेरणा। प्रधान ओमकार सिंह
डोईवाला (राजेंद्र वर्मा):
सिख धर्म के दसवें गुरु, खालसा पंथ के संस्थापक गुरु गोविंद सिंह जी के प्रकाश पर्व पर भनियावाला–नुन्नावाला गुरुद्वारे में गुरुवाणी, कीर्तन और सेवा भाव का अनुपम संगम देखने को मिला। पूरे दिन चले धार्मिक आयोजनों में संगत ने बढ़-चढ़कर सहभागिता की और गुरु साहिब की शिक्षाओं को आत्मसात करने का संकल्प लिया।
प्रकाश पर्व के अवसर पर पंजाब से आए रागी जत्थे ने भावपूर्ण शब्द कीर्तन प्रस्तुत कर संगत को निहाल किया। गुरुवाणी की मधुर तानों से गुरुद्वारा परिसर भक्तिरस में सराबोर रहा। कीर्तन के दौरान “वाहेगुरु” के जयकारों से वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।
इस अवसर पर पंजाब के एलोरा से पधारे संत गुरुसेवक सिंह ने प्रवचन में कहा कि गुरु गोविंद सिंह जी का जीवन अन्याय के विरुद्ध संघर्ष, धर्म की रक्षा और मानव समानता का प्रतीक है। उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना के माध्यम से समाज को साहस, आत्मसम्मान और सेवा का मार्ग दिखाया, जो आज की पीढ़ी के लिए भी मार्गदर्शक है।
गुरुद्वारा प्रधान ओमकार सिंह और गन्ना समिति के उपाध्यक्ष हरभजन सिंह ने कहा कि गुरु साहिब की शिक्षाएं नशामुक्त, अनुशासित और सेवा-प्रधान समाज के निर्माण की प्रेरणा देती हैं। उन्होंने युवाओं से गुरु गोविंद सिंह जी के आदर्शों को जीवन में उतारने की अपील की।
कार्यक्रम के अंत में गुरु का लंगर आयोजित किया गया, जिसमें सभी ने पंगत में बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। इस दौरान सभासद सुरेश सैनी, जसविंदर सिंह डाली, रोशन सैनी, रविंद्र सिंह, गुरु सेवक सिंह, जसपाल सिंह, किशन कश्यप सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।



