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नगर कीर्तन, कथा-कीर्तन और गतका ने नुन्नावाला को बनाया गुरु परंपरा का जीवंत केंद्र।

शहीदी सप्ताह में दिखी सेवा, अनुशासन और सामाजिक एकता की मिसाल।

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डोईवाला (राजेंद्र वर्मा):
भानियावाला के नुन्नावाला गुरुद्वारा में 21 से 27 दिसंबर तक चल रहा शहीदी सप्ताह केवल शहादत स्मरण का आयोजन नहीं, बल्कि सेवा, अनुशासन और सामाजिक एकता की सशक्त अभिव्यक्ति बनकर उभरा। गुरु गोबिंद सिंह जी के चार साहिबजादों की अमर शहादत को समर्पित इस सप्ताह ने संगत को गुरु परंपरा से जोड़ते हुए मानवता और धर्म रक्षा का संदेश दिया।
शहीदी सप्ताह के अंतर्गत गुरुद्वारों में अखंड पाठ, शबद कीर्तन, कथा-वाचन एवं अरदास के माध्यम से साहिबजादों—बाबा अजीत सिंह, बाबा जुझार सिंह, बाबा जोरावर सिंह एवं बाबा फतेह सिंह—और माता गुजरी कौर के सर्वोच्च बलिदान को नमन किया गया। धार्मिक कार्यक्रमों के साथ-साथ संगत द्वारा सेवा कार्यों में बढ़-चढ़कर सहभागिता की गई, जिससे पूरे क्षेत्र में अनुशासन और सौहार्द का वातावरण बना रहा।
पंच प्यारों की अगुवाई में निकले भव्य नगर कीर्तन हरिद्वार रोड स्थित नुन्नावाला गुरुद्वारे से आरंभ होकर भानियावाला, आर्यनगर सहित विभिन्न क्षेत्रों से गुजरते हुए पुनः गुरुद्वारे पर संपन्न हुआ।

नगर कीर्तन में गदरपुर से आई अकाल गतका पार्टी ने पारंपरिक युद्धकला का प्रदर्शन कर सिख शौर्य परंपरा को जीवंत किया।

वहीं पंजाब के एलोरा से पधारे संत कश्मीरा सिंह एवं कथावाचकों ने शहीदी इतिहास की कथाओं के माध्यम से संगत को यह संदेश दिया कि धर्म की रक्षा केवल तलवार से नहीं, बल्कि सत्य, संयम और सेवा से भी होती है।

गुरुद्वारा प्रधान ओमकार सिंह ने कहा कि शहीदी सप्ताह हमें गुरु परिवार के बलिदान से प्रेरणा लेकर समाज में सेवा और सद्भाव को बढ़ाने का मार्ग दिखाता है।

गन्ना समिति उपाध्यक्ष हरभजन सिंह ने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह जी और उनके परिवार की शहादत मानवता के इतिहास में अद्वितीय है और यह हमें अन्याय के विरुद्ध एकजुट रहने की सीख देती है।
इस अवसर पर सभासद सुरेश सैनी, सुरेंद्र सिंह खालसा, जसविंदर सिंह डाली, मनोज रावत, तरसेम सिंह राजा, विक्रम सिंह, जसवीर सिंह, भजन सिंह, प्रताप सिंह, रविंद्र सिंह, अर्जन सिंह, रणवीर सिंह, गुरपाल सिंह, ताजेंद्र सिंह, रोशन सैनी, नवीन बर्थवाल, रिसपाल, सुरेंद्र सिंह, बलदेव सिंह, प्रितपाल सिंह, असप्रीत सिंह सहित बड़ी संख्या में संगत ने मौजूद रही।

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