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राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की जमीन पर नापजोख से भड़का जनआक्रोश, पुलिस से झड़प, (ग्रामीणों का आरोप विश्वविद्यालय की आड़ में दूसरी परियोजना लाने की तैयारी, सरकार स्थिति स्पष्ट करे)

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डोईवाला (राजेंद्र वर्मा):
अप्रैल 2019 में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा शिलान्यास किए गए राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय को लेकर पहले से ही असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। अब विश्वविद्यालय के लिए चिन्हित भूमि पर प्रशासन द्वारा कराई जा रही नापजोख ने विवाद को और गहरा कर दिया है। बुधवार को ऋषिकेश के एसडीएम टीम के साथ मौके पर पहुंचे और माप-जोख की प्रक्रिया शुरू कर दी, जिससे क्षेत्र में तनाव फैल गया।

जैसे ही ग्रामीणों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को नापजोख की जानकारी मिली, वे बड़ी संख्या में घटनास्थल पर पहुंच गए और विरोध शुरू कर दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि जिस भूमि पर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय प्रस्तावित था, वहां अब किसी अन्य परियोजना को आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है, जबकि विश्वविद्यालय को लेकर न तो सरकार ने कोई स्पष्ट निर्णय लिया है और न ही उसे रद्द करने की कोई आधिकारिक घोषणा की गई है।

विरोध के दौरान स्थिति उस समय और बिगड़ गई, जब मौके पर मौजूद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जो बाद में झड़प में बदल गई। कांग्रेस कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने प्रशासन पर जनता को गुमराह करने और चुपचाप भूमि उपयोग बदलने का आरोप लगाया।

आक्रोशित लोगों ने एसडीएम से नापजोख का कार्य तत्काल रोकने की मांग की और चेतावनी दी कि जब तक राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के भविष्य को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की जाती, तब तक किसी भी प्रकार की प्रशासनिक कार्रवाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

कांग्रेस जिला अध्यक्ष मोहित उनियाल ने कहा कि राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय गढ़वाल की जनता का सपना है, जिसे वर्षों से लटकाया जा रहा है। अब उसकी जमीन पर चुपचाप नापजोख कर किसी दूसरी योजना की तैयारी जनता के साथ धोखा है। सरकार को तुरंत स्थिति साफ करनी चाहिए।

डोईवाला ब्लॉक प्रमुख गौरव चौधरी ने कहा कि यदि विश्वविद्यालय नहीं बनना था तो सरकार ने अब तक सच क्यों नहीं बताया। बिना जनसंवाद के भूमि उपयोग बदलना पूरी तरह असंवैधानिक है। ग्रामीण किसी भी हाल में इस अन्याय को स्वीकार नहीं करेंगे।

प्रधान अध्यक्ष अनूप चौहान ने कहा कि यह सिर्फ जमीन का मामला नहीं, बल्कि क्षेत्र के भविष्य का सवाल है। यदि विश्वविद्यालय की जगह कोई और परियोजना लाई गई, तो गांव-गांव से आंदोलन खड़ा किया जाएगा।

ग्रामीणों ने साफ कहा है कि यदि विश्वविद्यालय की जमीन पर किसी अन्य परियोजना को आगे बढ़ाने की कोशिश की गई तो आंदोलन और तेज होगा। वहीं प्रशासन की ओर से कहा गया है कि पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी। फिलहाल यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इस मौके पर तमाम कांग्रेसी नेता,जनप्रतिनिधि और सैकड़ों ग्रामीण मौजूद थे।

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