मौसम के बदले मिजाज ने किसानों को घेरा, धान की फसल पर दोहरी मार। (कटी हुई फसल को 100 प्रतिशत नुकसान की आशंका, पककर तैयार धान को भी खतरा)
डोईवाला (राजेंद्र वर्मा):
मौसम के बदले मिजाज ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। धान की फसल पर मौसम की दोहरी मार पड़ने की आशंका है। जिन किसानों ने धान की कटाई कर फसल खेतों में रखी हुई है, उन्हें सौ फीसदी नुकसान होने का डर सता रहा है। वहीं, खेतों में खड़ी पककर तैयार धान की फसल को भी भारी नुकसान पहुंचने की आशंका बनी हुई है। ऐसे में किसानों को अपनी महीनों की मेहनत और लागत डूबने का डर है।
धरमुचक, कुड़कावाला और बुल्लावाला क्षेत्र के किसानों का कहना है कि धान की कटाई के समय मौसम खराब होने से उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। कटी हुई फसल को बचाना चुनौती बन गया है। वहीं, खेतों में खड़ी पकी फसल की कटाई भी प्रभावित होने की आशंका है। किसानों के अनुसार, यदि मौसम का मिजाज इसी तरह बना रहा तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
भारतीय किसान यूनियन जिला अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह खालसा ने बताया कि मौसम खराब होने से धान की कटी हुई फसल को सौ फीसदी नुकसान होने की आशंका है। किसानों ने फसल तैयार करने में काफी मेहनत की है, लेकिन कटाई के समय मौसम की मार ने उनकी चिंता बढ़ा दी है।
प्रितपाल ने कहा कि खेतों में पककर तैयार खड़ी धान की फसल को भी नुकसान पहुंचने का खतरा है। मौसम खराब रहने से फसल की कटाई प्रभावित हो सकती है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
, किसान सालेकचंद ने बताया कि धान की फसल तैयार करने में किसानों ने काफी मेहनत और पैसा लगाया है। अब मौसम खराब होने से कटी हुई फसल को सुरक्षित रखना मुश्किल हो रहा है। किसानों को अपनी मेहनत बेकार होने की चिंता सता रही है।
किसान जयपाल ने कहा कि धान की फसल की कटाई के समय मौसम खराब होने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। कटी हुई फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका है, जबकि खेतों में खड़ी पकी फसल भी खतरे में है। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ सकता है।
मारखमग्रांट के प्रधान परमिंदर सिंह बाउ ने कहा कि मौसम की मार से धान की कटी हुई फसल को सौ फीसदी नुकसान होने की आशंका है। वहीं, खेतों में खड़ी पककर तैयार फसल को भी भारी नुकसान पहुंचने का खतरा बना हुआ है। उन्होंने सरकार से मांग की कि प्रभावित किसानों की फसलों के नुकसान का आकलन कराया जाए और उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए, ताकि किसानों को आर्थिक राहत मिल सके।



