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हिम्स जौलीग्रांट ने रचा नया कीर्तिमान, पांच वर्षीय बच्ची का सफल बोनमैरो ट्रांसप्लांट।

डेढ़ साल की बहन खुशी बनी सबसे कम उम्र की डोनर।

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डोईवाला (राजेंद्र वर्मा):
रियायती दरों पर गुणवत्तापरक स्वास्थ्य सेवाओं को समर्पित हिमालयन इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (हिम्स) जौलीग्रांट ने एक और कीर्तिमान स्थापित किया है। हिम्स के चिकित्सकों ने अप्लास्टिक एनीमिया से ग्रसित पांच वर्षीय बच्ची श्रुति का सफलतापूर्वक बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया है। विशेष बात यह है कि श्रुति के लिए उसकी डेढ़ वर्षीय छोटी बहन खुशी बोन मैरो डोनर बनी, जिसने उत्तराखंड व पश्चिम उत्तर प्रदेश में सबसे कम उम्र की बोन मैरो डोनर बनने का कीर्तिमान बनाया है।

बहन ने बहन को दिया नया जीवन।
श्रुति को जन्म से ही सर्दी, बुखार और त्वचा संक्रमण जैसी बीमारियां घेरती रहती थीं। परिजन उपचार के लिए उसे हिम्स जौलीग्रांट लाए, जहां वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. आवृत्ति बवेजा ने विस्तृत जांच कर अप्लास्टिक एनीमिया की पुष्टि की। चिकित्सीय टीम ने बोन मैरो ट्रांसप्लांट का निर्णय लिया और छोटी बहन खुशी के स्टेम सेल्स लेकर प्रत्यारोपण किया गया। प्रक्रिया के बाद श्रुति और खुशी दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं।

“राज्य में ही अब संभव हुआ उन्नत उपचार”।
स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय (एसआरएचयू) के अध्यक्ष डॉ. विजय धस्माना ने इस उपलब्धि पर अस्पताल की मेडिकल टीम को बधाई दी और कहा कि “हिमालयन अस्पताल ने एक बार फिर यह साबित किया है कि हम न सिर्फ गुणवत्तापरक बल्कि सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अब उत्तराखंड के मरीजों को उन्नत उपचार के लिए राज्य से बाहर जाने की आवश्यकता नहीं है।”

पहले सिर्फ बड़े शहरों में थी यह सुविधा।
बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा पहले केवल दिल्ली, मुंबई, और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों के अस्पतालों में ही उपलब्ध थी। अब हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट ने यह सुविधा उत्तराखंड में उपलब्ध कराकर एक नई मिसाल कायम की है। यह राज्य का पहला और एकमात्र अस्पताल है जहां बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा मौजूद है। उत्तराखंड का पहला सफल बोनमैरोट ट्रांसप्लांट भी हिम्स जौलीग्रांट में हुआ है।

क्या होता है बोन मैरो ट्रांसप्लांट।
बोन मैरो ट्रांसप्लांट में शरीर के क्षतिग्रस्त या खराब बोन मैरो को स्वस्थ स्टेम सेल्स से प्रतिस्थापित किया जाता है। यह प्रक्रिया ब्लड कैंसर, बोन मैरो फेल्योर और अन्य रक्त संबंधी बीमारियों के इलाज में की जाती है।

सफलता के पीछे समर्पित टीम।
इस जटिल प्रक्रिया को सफल बनाने में डॉ. अंकित बत्रा सहित बीएमटी नर्सिंग इंचार्ज रुबिता, नीरज, अंजलि, पल्लवी, कमला, महिमा और कल्पा की विशेष भूमिका रही। एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. प्रिया, नेफ्रोलॉजी से डॉ. शहबाज अहमद, ब्लड बैंक से डॉ. यशस्वी, और हेमेटोपैथॉलॉजी विभाग से डॉ. मानसी ने भी उपचार प्रक्रिया में अहम योगदान दिया।

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