ओटीपी पहले, सिलेंडर बाद में! 15 दिन की देरी से उपभोक्ता बेहाल, गैस डिलीवरी सिस्टम पर सवाल ।
बुकिंग के बाद हफ्तों इंतजार, रिकॉर्ड में पूरी दिख रही डिलीवरी; शिकायत करने पर ही हरकत में आ रही एजेंसी।
डोईवाला (राजेंद्र वर्मा):
घरेलू गैस उपभोक्ताओं की सुविधा के नाम पर लागू की गई ओटीपी आधारित गैस डिलीवरी व्यवस्था अब डोईवाला क्षेत्र में उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही है। हालात यह हैं कि कहीं बुकिंग के 12 से 15 दिन बाद भी सिलेंडर नहीं पहुंच रहा, तो कहीं डिलीवरी से पहले ही ओटीपी लेकर कागजों में गैस आपूर्ति पूरी दिखा दी जा रही है। इस अव्यवस्था से उपभोक्ताओं का भरोसा गैस डिलीवरी सिस्टम से लगातार उठता जा रहा है।
भानियावाला निवासी देवेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि उन्होंने समय पर घरेलू गैस की बुकिंग16 मार्च कराई थी। कई दिन बीत जाने के बाद एक दिन डिलीवरी कर्मी ने फोन कर उनसे ओटीपी ले लिया। कुछ ही देर में उनके मोबाइल पर गैस डिलीवरी पूरी होने का मैसेज भी आ गया, लेकिन सिलेंडर घर तक नहीं पहुंचा। जब डिलीवरी कर्मी को दोबारा फोन किया गया तो उसने कॉल उठाना बंद कर दिया। परेशान होकर उन्होंने डोईवाला के पूर्ति निरीक्षक गोकुल चंद रमोला से शिकायत की, जिसके बाद जाकर उन्हें सिलेंडर मिल सका।
इसी तरह भानियावाला क्षेत्र में गुरु राम स्कूल के पास रहने वाली आरती नेगी ने बताया कि उन्होंने 14 मार्च को गैस सिलेंडर की बुकिंग कराई थी, लेकिन 15 दिन से अधिक समय बीत जाने के बावजूद उनके घर सिलेंडर नहीं पहुंचा। बार-बार संपर्क करने के बावजूद कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया जा रहा, जिससे उनके घर की रसोई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
उपभोक्ताओं की बढ़ती शिकायतों पर डोईवाला स्थित इंडियन गैस एजेंसी के इंचार्ज राजेंद्र सिंह सजवान ने कहा कि एजेंसी की ओर से 23 मार्च तक की सभी बुकिंग की डिलीवरी की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि यदि किसी उपभोक्ता को सिलेंडर नहीं मिला है तो वह सीधे एजेंसी से संपर्क करे, समस्या का समाधान किया जाएगा।
हालांकि उपभोक्ताओं का आरोप है कि हकीकत इससे अलग है। उनका कहना है कि रिकॉर्ड और सिस्टम में डिलीवरी पूरी दिखा दी जाती है, जबकि वास्तविकता में सिलेंडर उपभोक्ता तक नहीं पहुंचता। डिलीवरी से पहले ओटीपी लेना नियमों का खुला उल्लंघन है और इससे गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी की आशंका भी बढ़ जाती है।
क्षेत्रवासियों ने प्रशासन और तेल कंपनियों से मांग की है कि गैस डिलीवरी व्यवस्था की सख्त निगरानी की जाए। ओटीपी केवल उसी समय लिया जाए जब सिलेंडर वास्तव में उपभोक्ता को सौंपा जाए और दोषी डिलीवरी कर्मियों व एजेंसियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि समय पर गैस न मिलना अब आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा एक गंभीर और संवेदनशील मुद्दा बन चुका है।



