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बीएसएफ की परंपरा केवल सीमा की रक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि सेवा, त्याग और पारिवारिक एकजुटता की है मिसाल। रावत

बीएसएफ के 61 वें स्थापना दिवस पर डोईवाला स्थित बीआईएएटी परिसर में आयोजित ।

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डोईवाला (राजेंद्र वर्मा):
बीएसएफ के 61 वें स्थापना दिवस पर डोईवाला स्थित बीआईएएटी परिसर में आयोजित कार्यक्रम इस बार सिर्फ सैन्य परंपराओं तक सीमित नहीं रहा। समारोह में एक अलग एंगल देखने को मिला—‘बीएसएफ परिवार’ की महत्वपूर्ण भूमिका को प्रमुखता से रेखांकित किया गया। कार्यक्रम में जवानों के परिवारों, शहीदों के परिजनों और सेवानिवृत्त अधिकारियों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया, जिससे आयोजन भावनात्मक और प्रेरणादायक दोनों बना।

स्थापना दिवस के अवसर पर बल की ऐतिहासिक उपलब्धियों के साथ-साथ उन परिवारों को धन्यवाद देने का संदेश दिया गया, जिनके सहयोग और त्याग के कारण जवान सीमाओं पर बिना किसी चिंता के देश की सेवा करते हैं। समारोह में कई परिवारों ने अपने अनुभव साझा किए और बीएसएफ जीवनशैली के अनुशासन एवं गौरव पर बात की।

कमांडेंट गजेंद्र सिंह रावत ने अपने संबोधन में कहा कि बीएसएफ की मजबूती केवल उसके जवानों में नहीं, बल्कि उन परिवारों में भी है जो हर परिस्थिति में बल को मानसिक शक्ति और स्थिरता देते हैं। उन्होंने कहा कि बीआईएएटी जैसे संस्थान केवल प्रशिक्षण केंद्र नहीं, बल्कि बल की भावनात्मक और सामाजिक संरचना को मजबूत करने का माध्यम भी हैं।

समारोह में मौजूद सेवानिवृत्त अधिकारी और पूर्व कार्मिकों ने भी अपने अनुभव और संस्मरण साझा किए। उन्होंने कहा कि बीएसएफ की परंपरा केवल सीमा की रक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि सेवा, त्याग और पारिवारिक एकजुटता की मिसाल है।

कार्यक्रम में उप-कमांडेंट हेमंत कोठियाल, उप-कमांडेंट लवराज सिंह, सहायक कमांडेंट राकेश चंद्र भट्ट, सहायक कमांडेंट विकास तथा डॉ. मनोज कुमार उपस्थित रहे। अंत में सभी ने शहीद जवानों एवं उनके परिवारों को नमन करते हुए बल की गौरवपूर्ण यात्रा को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।

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