(सृजन से संस्कार और संस्कृति से समाज तक, साईं सृजन पटल ने मनाया द्वितीय स्थापना दिवस)
डोईवाला (राजेंद्र वर्मा):
उत्तराखंड की संस्कृति, साहित्य और सृजनशील प्रतिभाओं को मंच देने वाले साईं सृजन पटल का द्वितीय स्थापना दिवस रविवार को जोगीवाला स्थित कार्यालय में धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया गया। समारोह में सामाजिक सरोकारों को केंद्र में रखते हुए स्कूली बच्चों को स्टेशनरी किट वितरित किए गए। वहीं पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए सिंगल यूज प्लास्टिक के प्रयोग को हतोत्साहित करने के लिए दुकानदारों, कार्मिकों और पटल के सदस्यों को जूट के बैग वितरित किए गए।
पटल के संस्थापक एवं सेवानिवृत्त प्राचार्य प्रो. के. एल. तलवाड़ ने बताया कि साईं सृजन पटल की स्थापना 9 अगस्त 2024 को हुई थी। दो वर्षों की यात्रा में पटल ने साहित्य, शिक्षा, पर्यावरण और सामाजिक सरोकारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। मासिक पत्रिका का नियमित प्रकाशन, मेधावी छात्रों को छात्रवृत्ति, लेखकश्री सम्मान, एनएसएस सर्वश्रेष्ठ स्वयंसेवी पुरस्कार, प्रतिभाओं का सम्मान, समाचार लेखन तथा एआई के प्रयोग का प्रशिक्षण पटल की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि पटल की मासिक पत्रिका आज उत्तराखंड की एक प्रामाणिक और प्रभावशाली पत्रिका के रूप में अपनी पहचान बना चुकी है। उत्तराखंड में लेखन और सृजन के लिए सदैव प्रतिबद्ध ध्येय वाक्य के साथ अब तक पत्रिका के 24 अंक सफलतापूर्वक प्रकाशित हो चुके हैं।
पत्रिका के उपसंपादक अंकित तिवारी ने कहा कि साईं सृजन पटल केवल साहित्यिक मंच तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और रचनात्मक चेतना को संरक्षित कर उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि बदलते दौर में साहित्य और संस्कृति को तकनीक से जोड़ते हुए नई प्रतिभाओं को अवसर देना पटल की प्राथमिकता है।सृजन से संस्कार और संस्कृति से समाज तक—दो वर्षों में साईं सृजन पटल ने साहित्यिक एवं सामाजिक सरोकारों की अपनी अलग पहचान बनाई है।
द्वितीय स्थापना दिवस समारोह में सलाहकार मंडल के सदस्य डॉ. एस.डी. जोशी, प्रो. राजेश कुमार उभान, डॉ. अनूप वीरेंद्र कठैत, डॉ. चंद्रभूषण बिजल्वाण, वैष्णवी लोहनी, नीलम तलवाड़, अक्षत तलवाड़, नित्या लोहनी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।



