एसआरएचयू में रामलीला महोत्सव का भव्य शुभारंभ राम-सीता जन्म प्रसंग ने मोहा मन। (हिमालयन रिक्रिएशनल एंड वेलफेयर ट्रस्ट (एचआरडब्ल्यूटी) की ओर से किया जा रहा आयोजन। स्टाफ और छात्र-छात्राएं निभा रहे हैं सभी पात्रों की भूमिका, 20 अक्टूबर तक प्रतिदिन शाम 6:30 बजे से होगा मंचन)
डोईवाला (राजेंद्र वर्मा):
हिमालयन रिक्रिएशनल एंड वेलफेयर ट्रस्ट (एचआरडब्ल्यूटी) की ओर से स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय (एसआरएचयू), जौलीग्रांट के सेंट्रल पार्क में गणेश पूजन के साथ रामलीला महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। रामलीला के आयोजन से पूर्व सभी कलाकारों ने विधिवत पूजन कर भगवान श्रीराम का स्मरण किया और महोत्सव के सफल आयोजन की कामना की। इस रामलीला की विशेष बात यह है कि इसमें विश्वविद्यालय के डॉक्टर, नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ सहित विभिन्न फैकल्टी के सदस्य, अधिकारी और कर्मचारी तथा छात्र-छात्राएं विभिन्न पात्रों की भूमिका निभा रहे हैं।
महोत्सव के पहले दिन श्रवण लीला, रावण तपस्या, शिव-पार्वती प्रसंग, विष्णु-लक्ष्मी प्रसंग, दशरथ प्रसंग, राम जन्म, जनक प्रसंग और सीता जन्म की लीलाओं का सजीव मंचन किया गया। भगवान राम और माता सीता के जन्म प्रसंगों ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया।
इस अवसर पर स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. विजय धस्माणा ने कहा कि रामलीला केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़ने का सशक्त माध्यम है। भगवान श्रीराम का जीवन चरित्र हमें मर्यादा, कर्तव्य, त्याग और आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा देता है। आयोजन का उद्देश्य भगवान श्रीराम के आदर्शों, भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाना है।
20 अक्टूबर तक होगा रामायण की प्रमुख लीलाओं का मंचन
11 अक्टूबर, रविवार: श्रवण लीला, रावण तपस्या, शिव-पार्वती प्रसंग, विष्णु-लक्ष्मी प्रसंग, दशरथ प्रसंग, राम जन्म, जनक प्रसंग और सीता जन्म।
12 अक्टूबर, सोमवार: सुबाहु-मारीच प्रसंग, विश्वामित्र आगमन, राम-लक्ष्मण प्रसंग, ताड़का वध, सुबाहु-मारीच वध और अहिल्या उद्धार/अवतरण।
13 अक्टूबर, मंगलवार: सीता स्वयंवर, परशुराम-लक्ष्मण संवाद और राम बारात।
14 अक्टूबर, बुधवार: दशरथ दरबार, कैकेयी-मंथरा संवाद, दशरथ-कैकेयी संवाद, राम वनवास, सुमंत विदाई और केवट लीला।
15 अक्टूबर, गुरुवार: भरत-शत्रुघ्न आगमन, भरत मिलाप, शूर्पणखा नासिका छेदन, खर-दूषण वध और रावण दरबार।
16 अक्टूबर, शुक्रवार: बूढ़ा मारीच प्रसंग, साधु वेश में रावण, सीता हरण, शबरी भक्ति/प्रसंग, हनुमान अवतरण/मिलन और सुग्रीव दरबार।
17 अक्टूबर, शनिवार: बाली-सुग्रीव युद्ध, अशोक वाटिका प्रसंग, अक्षय कुमार वध, मेघनाद प्रसंग और लंका दहन।
18 अक्टूबर, रविवार: रामेश्वर स्थापना, रावण दरबार, विभीषण का लंका से निष्कासन, अंगद-रावण संवाद, लक्ष्मण शक्ति और हनुमान जी द्वारा संजीवनी बूटी लाना।
19 अक्टूबर, सोमवार: कुंभकरण वध, मेघनाद वध, सती सुलोचना प्रसंग, अहिरावण वध, मकरध्वज प्रसंग और रावण वध।



