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उत्तराखंड स्थापना दिवसः एसआरएचयू में ज्ञान, संस्कृति और सम्मान का संगम।

उत्तराखंड स्थापना दिवस की 25वीं वर्षगांठ पर स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय में विविध कार्यक्रमों का आयोजन।

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डोईवाला (राजेंद्र वर्मा):
स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय (एसआरएचयू) में उत्तराखंड स्थापना दिवस की 25वीं वर्षगांठ बड़े हर्षाेल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में अनेक अकादमिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत क्विज एवं पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता से हुई, जिसमें छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और उत्तराखंड की संस्कृति, इतिहास तथा विकास यात्रा से जुड़े विषयों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में विजयी छात्र-छात्राओं को सम्मानित कर प्रोत्साहित किया गया।
इस अवसर पर लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी, मसूरी के पूर्व निदेशक एवं वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ. संजीव चोपड़ा (सेवानिवृत्त) द्वारा एक विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। उन्होंने अपने संबोधन में उत्तराखंड के विकास, प्रशासनिक चुनौतियों तथा युवाओं की भूमिका पर अपने विचार साझा किए। एसआरएचयू के कुलपति डॉ. राजेन्द्र डोभाल ने डॉ. चोपड़ा को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
एसआरएचयू के अध्यक्ष डॉ. विजय धस्माना ने अपने संदेश में कहा कि उत्तराखंड राज्य ने पिछले 25 वर्षों में बहुत प्रगति की है लेकिन अभी भी बहुत काम करना बाकी है। हमें अपने राज्य को और भी विकसित बनाने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वरोजगार, पलायन रोकने के लिए के लिए मिलकर काम करना होगा।
कार्यक्रम की अगली कड़ी में दोपहर बाद उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोकगायक दर्शन फर्स्वाण और स्वाति भट्ट द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। उनके प्रस्तुत किए गए लोकगीतों और झोड़े-छपेली की मनमोहक धुनों पर छात्र-छात्राएं झूम उठे। विश्वविद्यालय परिसर में उत्तराखंडी संस्कृति की झलक ने सभी को भावविभोर कर दिया।
एसआरएचयू के अध्यक्ष डॉ. विजय धस्माना ने इस अवसर पर कहा कि उत्तराखंड की स्थापना दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि प्रदेश के विकास और संस्कृति के संरक्षण का संकल्प लेने का अवसर है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों और आयोजन टीम को सफल आयोजन के लिए बधाई दी।

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