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राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की भूमि पर विवाद, ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया।

पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मार्च 2019 में किया था शिलान्यास, अब भूमि किसी अन्य को सौंपे जाने के विरोध में तेज हुआ आंदोलन।

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डोईवाला (राजेंद्र वर्मा):
राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की भूमि को किसी अन्य को आवंटित किए जाने के विरोध में लिस्ट्राबाद ग्राम पंचायत में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन आरंभ कर दिया है। इस आंदोलन का नेतृत्व लिस्ट्राबाद ग्राम प्रधान अनिल कुमार कर रहे हैं।

धरना स्थल पर मौजूद भाजपा किसान मोर्चा गढ़वाल सहसंयोजक अरुण शर्मा ने कहा कि यह भूमि पूरी तरह से राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की है और इसे किसी और को सौंपना न केवल अनुचित है बल्कि कानून और संविधान के खिलाफ भी है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के युवाओं के भविष्य के लिए यह विश्वविद्यालय अत्यंत आवश्यक है। मार्च 2019 में पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भट्ट नगरी, रानीपोखरी में इसका शिलान्यास किया था। हम किसी भी कीमत पर इस भूमि को सुरक्षित रखेंगे और सरकार से कड़ा कदम उठाने की मांग करते हैं। यदि हमारी बात नहीं मानी गई तो आंदोलन और व्यापक रूप लेगा।
धरना स्थल पर पहुंचे ब्लॉक प्रमुख गौरव चौधरी ने कहा कि इस आंदोलन का पूरा समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की भूमि को सुरक्षित रखना हमारी जिम्मेदारी है। यह केवल आज की पीढ़ी के लिए नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए भी जरूरी है। प्रशासन को तुरंत कदम उठाना चाहिए।
धरना प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे ग्राम प्रधान अनिल कुमार ने कहा कि यह धरना सिर्फ आज की पीढ़ी की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के शिक्षा के अधिकार की लड़ाई है। हम किसी भी हालत में इस भूमि को किसी और को नहीं देने देंगे। यह विश्वविद्यालय हमारी युवाओं की आकांक्षाओं और उनके भविष्य की प्रतीक भूमि है। इसे सुरक्षित रखना हमारी जिम्मेदारी है। यदि हमारी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज होगा।

धरना स्थल पर अध्यक्ष प्रधान संगठन न्याय पंचायत रानीपोखरी अनूप चौहान, संदीप भट्ट, अरुण रावत, जीवन चौहान, नरेंद्र चौहान, घनश्याम, पंकज यादव, संजय असवाल, सुशील ठाकुर, रजिया, हिना अंसारी, प्रवेश कुमार, रविन्द्र चौहान, कीर्ति रावत, देवेश्वर रतूड़ी, संतोषी, जगत राम पैन्यूली, गीता, रूबी, रवीना, आशा, सुमित्रा सहित ग्रामीणों की बड़ी संख्या मौजूद रही।
स्थानीय ग्रामीणों और नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई नहीं की, तो यह आंदोलन और व्यापक और तेज रूप ले सकता है।

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