साहित्य पर्यटन को नई पहचान देगा उत्तराखंड, लेखक गांव की पहल को मिला सरकार का साथ। (देश के पहले लेखक गांव की अवधारणा को मिलेगा व्यापक विस्तार, सितंबर में शुरू होगी ‘सुमित्रानंदन पंत साहित्य पर्यटन पथ यात्रा)
डोईवाला (राजेंद्र वर्मा):
उत्तराखंड सरकार द्वारा साहित्य पर्यटन को प्रोत्साहित करने की घोषणा का देश के पहले लेखक गांव ने स्वागत किया है। लेखक गांव ने इसे प्रदेश की साहित्यिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने वाला दूरदर्शी कदम बताया है। लेखक गांव का कहना है कि वर्षों से जिस “साहित्य पर्यटन” की अवधारणा पर कार्य किया जा रहा था, अब उसे सरकार की पहल से नई गति और व्यापक स्वरूप मिलेगा।
लेखक गांव ने अपनी स्थापना के बाद से साहित्य, संस्कृति, पर्यावरण और पर्यटन को एक सूत्र में जोड़ते हुए “साहित्य पर्यटन पथ” की अवधारणा पर लगातार कार्य किया है। इसका उद्देश्य केवल पर्यटन को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि साहित्यकारों की जन्मस्थली, कर्मभूमि, रचनात्मक विरासत और उनसे जुड़े सांस्कृतिक परिवेश से लोगों को जोड़ना है। इसी सोच के तहत लेखक गांव ने साहित्य ग्रामों की अवधारणा को भी आगे बढ़ाया है।
इसी क्रम में वर्ष 2025 में सुमित्रानंदन पंत जयंती के अवसर पर हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के पर्यटन विभाग के सहयोग से “सुमित्रानंदन पंत साहित्य पर्यटन पथ” का सर्वेक्षण कराया गया। इसके आधार पर तैयार डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन लेखक गांव में किया गया। इसके बाद 23 मई 2026 को “साहित्य पर्यटन पथ” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित हुई, जिसमें देशभर के साहित्यकारों, पर्यटन विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं ने उत्तराखंड में साहित्य पर्यटन की संभावनाओं पर व्यापक चर्चा की।
मानना है कि कौसानी, रामगढ़, मायावती, अल्मोड़ा, कालीमठ, कण्वाश्रम, माणा, दुगड्डा, पाली और मालकोटी जैसे अनेक साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक स्थलों को एक समेकित “साहित्य पर्यटन पथ” के रूप में विकसित किया जा सकता है। इससे प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को नई पहचान मिलने के साथ स्थानीय पर्यटन और रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।
लेखक गांव की निदेशक विदुषी ‘निशंक’ ने कहा कि साहित्य पर्यटन केवल भ्रमण नहीं, बल्कि समाज को अपनी सांस्कृतिक स्मृतियों, साहित्यिक विभूतियों और प्रकृति से जोड़ने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि लेखक गांव भविष्य में भी राज्य सरकार, पर्यटन विभाग, शैक्षणिक संस्थानों और साहित्यिक संगठनों के सहयोग से इस अभियान को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।
उन्होंने बताया कि आगामी सितंबर माह में लेखक गांव से “सुमित्रानंदन पंत साहित्य पर्यटन पथ यात्रा” का शुभारंभ किया जाएगा। यह यात्रा कौसानी तक पहुंचेगी, जहां सुमित्रानंदन पंत की जन्मस्थली पर साहित्यिक आयोजन और लिटरेचर फेस्टिवल आयोजित किया जाएगा।
लेखक गांव का विश्वास है कि राज्य सरकार की इस पहल से उत्तराखंड देश में साहित्य पर्यटन का अग्रणी केंद्र बनेगा और प्रदेश की समृद्ध साहित्यिक विरासत को वैश्विक पहचान मिलेगी।



