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100 किडनी ट्रांसप्लांट की सफलता, हिम्स जौलीग्रांट ने बढ़ाया चिकित्सा सेवाओं का भरोसा। (हिम्स जौलीग्रांट में केक काटकर मनाया जश्न, रोगिंयों व उनके परिजनों ने जाताया आभार) (हिम्स जौलीग्रांट में नेफ्रोलॉजी और यूरोलॉजी विशेषज्ञों के समन्वित प्रयासों से ट्रांसप्लांट सेवाओं में हासिल की महत्वपूर्ण उपलब्धि)

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डोईवाला (राजेंद्र वर्मा):
हिम्स जौलीग्रांट ने किडनी ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए 100वां किडनी ट्रांसप्लांट पूरा किया। इस उपलब्धि के अवसर पर हिम्स जौलीग्रांट परिसर में कार्यक्रम आयोजित कर केक काटकर जश्न मनाया गया। कार्यक्रम में किडनी डोनर, ट्रांसप्लांट करा चुके मरीज और उनके परिजनों को पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया गया। उन्होंने हिम्स की चिकित्सकीय टीम और उपचार सेवाओं के प्रति आभार जताया। इस दौरान एसआरएचयू के अध्यक्ष डॉ.विजय धस्माणा, कुलपति डॉ.राजेंद्र डोभाल, डीन डॉ.ए.शरीफ, प्रिसिंपल डॉ.रेनू धस्माणा, डॉ.हेमचंद्र पांडेय, डॉ.राजेश माहेश्वरी, डॉ.विकास चंदेल, डॉ.शिखर अग्रवाल, डॉ.राजीव सरपाल आदि मौजूद रहे।

*उत्तराखंड में किडनी ट्रांसप्लांट का विश्व स्तरीय स्वीकृत संस्थान: डॉ. धस्माणा*
इस अवसर पर स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. विजय धस्माणा ने कहा कि 100 सफल किडनी ट्रांसप्लांट हिम्स जौलीग्रांट के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह पूरी टीम की विशेषज्ञता, समर्पण और आपसी समन्वय का परिणाम है। उन्होंने ट्रांसप्लांट टीम सहित सभी चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य सहयोगी कर्मचारियों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी।

अध्यक्ष डॉ. विजय धस्माणा ने कहा कि हिम्स जौलीग्रांट उत्तराखंड में किडनी ट्रांसप्लांट का विश्व स्तरीय स्वीकृत संस्थान है। अस्पताल में जटिल ट्रांसप्लांट सर्जरी के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित टीम है। जिसकी वजह से अब इस तरह की जटिल ट्रांसप्लांट सर्जरी हिमालयन हॉस्पिटल में सफलतापूर्वक की जा रही है। हिमालयन अस्पताल में अंग प्रत्यारोपण सेवा में भी विस्तार किया जायेगा। इसके अंतर्गत भविष्य में लीवर, हृदय व पैनक्रियाज जैसे अंगों का प्रत्यारोपण भी किया जाएगा।

*विशेषज्ञ टीम के समन्वय से मिली सफलता*
नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. विकास चंदेल ने कहा कि किडनी ट्रांसप्लांट एक जटिल प्रक्रिया है नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी, एनेस्थीसिया, क्रिटिकल केयर और नर्सिंग सहित विभिन्न विभागों के समन्वय से मरीजों को समग्र उपचार उपलब्ध कराया जाता है।
यूरोलॉजिस्ट डॉ. शिखर अग्रवाल ने बताया कि प्रत्येक ट्रांसप्लांट अपने आप में चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया होती है। 100 सफल किडनी ट्रांसप्लांट का पड़ाव टीम के अनुभव, विशेषज्ञता और निरंतर प्रयासों को दर्शाता है।

*अपनों ने दिया किडनी दान, मरीजों ने जताया आभार*
कार्यक्रम में किडनी डोनर्स और ट्रांसप्लांट करा चुके मरीजों की मौजूदगी विशेष रही। कई परिजनों ने अपने प्रियजनों को किडनी दान कर उनके उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एक महिला ने अपने पति तथा एक अन्य डोनर ने अपने बेटे को किडनी दान की।
डोनर्स और मरीजों ने अपने अनुभव साझा करते हुए हिम्स जौलीग्रांट की चिकित्सकीय टीम, नर्सिंग स्टाफ और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि उपचार के दौरान चिकित्सकों और स्टाफ का सहयोग उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण रहा।

*समय पर जांच से किडनी को बचाया जा सकता है*
नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. विकास चंदेल व यूरोलॉजिस्ट डॉ. शिखर अग्रवाल ने बताया कि किडनी की बीमारी को शुरुआती स्तर पर पहचानना बेहद जरूरी है। मधुमेह और उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोगों को नियमित रूप से किडनी की जांच करानी चाहिए। इसके साथ ही नमक का सीमित सेवन, पर्याप्त पानी पीना, नियमित व्यायाम और संतुलित आहार अपनाना जरूरी है। चिकित्सकीय सलाह के बिना दर्द निवारक दवाओं का लंबे समय तक सेवन करने से भी बचना चाहिए।

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