Blog

पापी पेट का सवाल है: बांस के डंडों पर बंधी रस्सी, पीढ़ियों से चला आ रहा नन्हे कलाकारों का साहसिक हुनर, (हर नुक्कड़ पर पारंपरिक कला का जीवंत प्रदर्शन, मेहनत और आत्मसम्मान के साथ जीवन यापन की मिसाल)

खबर को सुनें

डोईवाला (राजेंद्र वर्मा):
डोईवाला नगर के प्रमुख चौराहों और नुक्कड़ों पर जब दोनों ओर मजबूत बांस के डंडों पर रस्सी बांधी जाती है, तो वहां देखते ही देखते लोगों की भीड़ जुट जाती है। रस्सी पर संतुलन साधते नन्हे कलाकार अपने साहसिक करतबों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। ऊंचाई पर निर्भीक कदम, संतुलित चाल और निरंतर अभ्यास से निकली फुर्ती इस पारंपरिक कला की पहचान है।

यह दृश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही आजीविका और आत्मनिर्भरता की कहानी भी है। सीमित साधनों के बावजूद यह परिवार अपने हुनर के दम पर सम्मानजनक जीवन जीने का प्रयास कर रहा है। बच्चों की प्रस्तुति दर्शकों के बीच खास आकर्षण का केंद्र बनती है और तालियों की गूंज उनके हौसले को और मजबूत करती है।

स्थानीय लोग भी इस पारंपरिक कला की सराहना करते हुए कलाकारों को प्रोत्साहित करते हैं। कई नागरिक इसे मेहनत और संघर्ष का सकारात्मक उदाहरण मानते हैं। यह हुनर न केवल परिवार की रोज़ी-रोटी का साधन है, बल्कि सांस्कृतिक विरासत को भी जीवित रखे हुए है।

करतब दिखाने वाले छत्तीसगढ़ के निवासी राजेश कुमार ने बताया कि यह हमारा पुश्तैनी हुनर है। मेरे दादा और परदादा भी इसी तरह रस्सी पर करतब दिखाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। आज मैं भी वही परंपरा निभा रहा हूं। मेरी 10 वर्षीय पुत्री अन्नू और मेरा पुत्र भी अपना टैलेंट दिखाते हैं। हम पूरे परिवार सहित उत्तराखंड में मेहनत करके सम्मानजनक तरीके से रोज़ी-रोटी कमा रहे हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button