बाहरी राज्य के कथित भू-माफियाओं द्वारा अवैध कॉलोनी निर्माण का मामला गरमाया, डीएम के निर्देश पर फिर तेज होगी सीलिंग कार्रवाई !
देहरादून/डोईवाला।
डोईवाला क्षेत्र में कथित बाहरी राज्य के व्यक्तियों द्वारा अवैध निर्माण एवं सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण कर मकान बनाकर बेचने के मामले में जिला प्रशासन ने एक बार फिर गंभीरता दिखाई है। मामले में प्राप्त शिकायत पर जिलाधिकारी देहरादून ने संज्ञान लेते हुए उपजिलाधिकारी डोईवाला को तात्कालिक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसके बाद उपजिलाधिकारी कार्यालय द्वारा संबंधित प्रकरण की जांच एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) को निर्देशित किया गया है।
शिकायतकर्ता अधिवक्ता गुरजीत सिंह सैनी ने जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना-पत्र में आरोप लगाया है कि कुछ बाहरी राज्य के व्यक्तियों द्वारा डोईवाला क्षेत्र में कृषि एवं अन्य भूमि खरीदकर बिना स्वीकृत मानचित्रों के अवैध निर्माण किए गए तथा सार्वजनिक भूमि एवं सड़क क्षेत्र पर भी अतिक्रमण किया गया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि इन निर्माणों को आम लोगों को विक्रय करने का प्रयास किया जा रहा है।
शिकायत के अनुसार एमडीडीए द्वारा पूर्व में लगभग 13 से 14 अवैध निर्माणों को चिन्हित कर नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इनमें से कुछ निर्माणों के संबंध में माननीय उपजिलाधिकारी न्यायालय द्वारा सीलिंग के आदेश भी पारित किए गए थे। निर्धारित तिथि पर सीलिंग कार्रवाई के प्रयास हुए, किंतु मौके पर लोगों के निवासरत पाए जाने तथा अन्य प्रशासनिक कारणों से कार्रवाई पूर्ण नहीं हो सकी।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि न्यायालय के आदेशों के अनुपालन से बचने के उद्देश्य से सीलिंग कार्रवाई से ठीक पूर्व संबंधित भवनों में लोगों को बसाया गया, जिससे कार्रवाई प्रभावित हुई। साथ ही यह भी मांग की गई है कि न्यायालय के आदेशों की अवहेलना के संबंध में जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाए।
जिलाधिकारी द्वारा मामले को गंभीरता से लेते हुए उपजिलाधिकारी को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। उपजिलाधिकारी कार्यालय से भी संबंधित विभागों को जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने तथा न्यायालयीय आदेशों के प्रभावी अनुपालन हेतु आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है।
शिकायतकर्ता ने प्रशासन से मांग की है कि पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध कराकर अवैध निर्माणों पर सीलिंग की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि न्यायालय द्वारा पारित आदेशों का प्रभावी अनुपालन हो सके तथा भविष्य में कोई भी व्यक्ति न्यायालयीय एवं प्रशासनिक आदेशों को निष्प्रभावी करने का प्रयास न कर सके।



