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हिम्स जौलीग्रांट में एडवांस्ड ऑर्थाेग्नैथिक सर्जरी की शुरुआत, (पांच मरीजों की निःशुल्क सफल सर्जरी, आधुनिक कंप्यूटर एडेड तकनीक से जबड़ों की विकृति का किया गया सुधार)

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डोईवाला (राजेंद्र वर्मा):
हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (हिम्स) जौलीग्रांट ने जन्मजात कटे होंठ एवं तालु से प्रभावित मरीजों के उपचार के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल के प्लास्टिक सर्जरी विभाग द्वारा स्माइल ट्रेन प्रोजेक्ट के अंतर्गत अब एडवांस्ड ऑर्थाेग्नैथिक सर्जरी की सुविधा शुरू कर दी गई है। इस नई पहल के तहत पांच मरीजों की निःशुल्क सफल सर्जरी की गई।
हिम्स जौलीग्रांट में स्माइल ट्रेन प्रोजेक्ट के निदेशक डॉ. संजय द्विवेदी एवं क्लेफ्ट ऑर्थाेडॉन्टिस्ट डॉ. रेनू परमार ने बताया कि ऑर्थाेग्नैथिक सर्जरी के माध्यम से छोटे-बड़े जबड़ों की विकृति, असंतुलन और मिस-अलाइनमेंट को अत्याधुनिक तकनीक से ठीक किया जाता है। कंप्यूटर एडेड प्लानिंग की सहायता से की जाने वाली यह सर्जरी मरीज के चेहरे की संरचना को संतुलित एवं सामान्य रूप देने में सहायक होती है। इससे मरीजों को बेहतर कार्यात्मक परिणामों के साथ आत्मविश्वास में भी वृद्धि मिलती है। उन्होंने बताया कि जन्मजात कटे होंठ एवं तालु की समस्या के साथ जन्म लेने वाले 50 प्रतिशत से अधिक मरीजों को ऑर्थाेडॉन्टिक उपचार के बाद ऑर्थाेग्नैथिक सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है। यह उन्नत प्रक्रिया मरीजों के चबाने, बोलने और चेहरे की बनावट से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
डॉ. रेनू परमार ने बताया कि उन्हें क्लेफ्ट एवं क्रेनियोफेशियल उपचार के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। हिम्स जौलीग्रांट में एडवांस्ड क्लेफ्ट एवं क्रेनियोफेशियल सेवाओं का विस्तार मरीजों को समग्र और विश्वस्तरीय उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस सफल सर्जरी पर निदेशक अस्पताल सेवाएं डॉ. हेमचंद्र ने पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि स्माइल ट्रेन प्रोजेक्ट के माध्यम से क्लेफ्ट मरीजों को आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रयास निरंतर जारी रहेगा। संस्थान भविष्य में भी इस क्षेत्र में आवश्यक संसाधन और सहयोग प्रदान करता रहेगा।

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क्लेफ्ट मरीजों के लिए समर्पित है स्माइल ट्रेन प्रोजेक्ट।
डोईवाला। हिम्स जौलीग्रांट का स्माइल ट्रेन प्रोजेक्ट पिछले 22 वर्षों से जन्मजात कटे होंठ एवं तालु से प्रभावित बच्चों और मरीजों को निःशुल्क उपचार सेवाएं प्रदान कर रहा है। परियोजना के माध्यम से उत्तराखंड सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए 10,000 से अधिक मरीजों का सफल उपचार किया जा चुका है। उत्कृष्ट सेवाओं के कारण हिम्स जौलीग्रांट देश के प्रमुख क्लेफ्ट उपचार केंद्रों में अपनी विशेष पहचान बना चुका है।

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