लेखक गाँव–आईजीएनसीए के बीच सांस्कृतिक सहयोग का एमओयू, (हिमालयी साहित्य, कला और लोकविरासत के संरक्षण को मिलेगा नया आयाम)
डोईवाला (राजेंद्र वर्मा):
नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) में आयोजित समारोह में देश के पहले लेखक गाँव, देहरादून और आईजीएनसीए के बीच सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं शोध सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण समझौता (एमओयू) संपन्न हुआ। यह करार हिमालयी क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में अहम पहल माना जा रहा है।
कार्यक्रम में आईजीएनसीए के डीन (प्रशासन) प्रो. रमेश गौड़ ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक पहचान लोकपरंपराओं और साहित्य में निहित है। इस अवसर पर लेखक गाँव पर आधारित एक वृत्तचित्र का प्रदर्शन भी किया गया, जिसमें उसकी संकल्पना और कार्यों को प्रस्तुत किया गया।
आईजीएनसीए के सदस्य सचिव प्रो. सच्चिदानंद जोशी ने हिमालय को भारतीय सभ्यता की आत्मा बताते हुए लेखक गाँव की पहल की सराहना की।
लेखक गाँव की निदेशक विदुषी निशंक ने कहा कि लेखक गाँव केवल एक भौतिक परिसर नहीं, बल्कि साहित्य, संस्कृति, कला और सृजन का जीवंत केंद्र है। उन्होंने कहा कि लेखक गाँव का उद्देश्य हिमालय की लोकभाषाओं, लोककलाओं और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण कर उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान करना है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस सहयोग से शोध, दस्तावेजीकरण और सांस्कृतिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
एमओयू के तहत दोनों संस्थान संयुक्त रूप से शोध, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, साहित्यिक गतिविधियों और हिमालयी विरासत के संरक्षण से जुड़े कार्य करेंगे।
इस अवसर पर लेखक गाँव की ओर से डॉ. सर्वेश उनियाल, डॉ. बेचैन कंडियाल, डॉ. वेद प्रकाश, प्रो. श्रीनिवास त्यागी, डॉ. अल्का सिंह, डॉ. दर्शनी प्रिया, डॉ. नमिता जैन और डॉ. साधना अग्रवाल उपस्थित रहे। वहीं आईजीएनसीए की ओर से प्रो. रिचा नेगी, प्रो. अनिल कुमार, डॉ. दिलीप, डॉ. नवीन और डॉ. जसवीर सहित अन्य अधिकारी एवं विद्वान समारोह में मौजूद रहे।



