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डीपफेक युग में एआई पर अंतरराष्ट्रीय व्याख्यान, छात्रों को बताए अवसर और खतरे, (एसआरएचयू जौलीग्रांट में विशेषज्ञ डॉ. टैडी मंटोरो ने डीपफेक तकनीक के उपयोग, जोखिम और जिम्मेदार नवाचार पर डाला प्रकाश)

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डोईवाला (राजेंद्र वर्मा):
एसआरएचयू स्कूल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, जौलीग्रांट में “डीपफेक के युग में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंसः अवसर, जोखिम और जिम्मेदार नवाचार” विषय पर अंतरराष्ट्रीय अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। जिसमें विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डीपफेक तकनीक के विभिन्न पहलुओं को सरल और प्रभावी ढंग से समझाया गया।
मुख्य वक्ता नुसा पुत्रा विश्वविद्यालय, इंडोनेशिया के डॉ. टैडी मंटोरो ने बताया कि डीपफेक तकनीक उन्नत एआई मॉडलों पर आधारित होती है, जो बड़े पैमाने पर डाटा का विश्लेषण कर वास्तविक जैसे दिखने वाले वीडियो, चित्र और ऑडियो तैयार करती है। उन्होंने जनरेटिव एडवर्सेरियल नेटवर्क (जीएएन) जैसे मॉडलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये तकनीकें नकली और असली सामग्री के बीच अंतर करना बेहद कठिन बना देती हैं। डॉ. मंटोरो ने डीपफेक के सकारात्मक उपयोगों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसका इस्तेमाल शिक्षा में आभासी शिक्षण सामग्री तैयार करने, स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रशिक्षण और सिमुलेशन तथा मनोरंजन उद्योग में रचनात्मक प्रयोगों के लिए किया जा सकता है। इससे जटिल विषयों को अधिक रोचक और सहज तरीके से समझाया जा सकता है। उन्होंने इसके दुष्परिणामों को लेकर गंभीर चिंता भी जताई। उन्होंने विद्यार्थियों को सचेत करते हुए सलाह दी कि किसी भी डिजिटल सामग्री पर आंख मूंदकर विश्वास न करें और उसकी सत्यता की जांच अवश्य करें। कार्यक्रम के दौरान महानिदेशक (शैक्षणिक विकास) डॉ. विजेंद्र चौहान और प्रिंसिपल डॉ. प्रमोद कुमार ने डॉ. टैडी मंटोरो को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। अंत में विद्यार्थियों ने डीपफेक की पहचान, नियंत्रण और एआई में करियर से जुड़े सवाल पूछे, जिनका मुख्य वक्ता ने विस्तार से उत्तर दिया।

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