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लेखक गांव कल्पना से परे साहित्यिक लोक। प्रो. के.जी. सुरेश (इंडिया हैबिटेट सेंटर के निदेशक ने किया भारत के प्रथम लेखक गांव का भ्रमण, एमओयू से राष्ट्रीय स्तर पर सहयोग के संकेत)

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डोईवाला (राजेंद्र वर्मा):
इंडिया हैबिटेट सेंटर के निदेशक प्रो. के.जी. सुरेश ने भारत के प्रथम लेखक गांव का भ्रमण कर इसे भारतीय ज्ञान परंपरा, साहित्य और सृजनशीलता का अद्भुत केंद्र बताया। उन्होंने उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, भारत सरकार के पूर्व शिक्षा मंत्री एवं लेखक गांव के संस्थापक डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ से भेंट कर साहित्य, संस्कृति, शिक्षा और भावी सहयोग पर विस्तार से चर्चा की।

लेखक गांव पहुंचने पर प्रो. सुरेश ने भगवान नरसिंह नागराजा मंदिर में दर्शन किए। इसके बाद उन्होंने नालंदा पुस्तकालय, शोध एवं अनुसंधान केंद्र, संजीवनी वाटिका, नक्षत्र वाटिका और नवग्रह वाटिका का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि लेखक गांव की संकल्पना भारतीय संस्कृति, प्रकृति, अध्यात्म और ज्ञान का सजीव उदाहरण है, जो इसे एक विशिष्ट पहचान देती है।

प्रो. के.जी. सुरेश ने कहा कि लेखक गांव केवल एक परिसर नहीं, बल्कि भारतीय साहित्यिक चेतना और बौद्धिक परंपरा का जीवंत लोक है। यहां साहित्य, संस्कृति, शोध और अध्यात्म का ऐसा समन्वय दिखाई देता है, जो कल्पना से परे है। अल्प समय में लेखक गांव ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है और यह देशभर के लेखकों, साहित्यकारों, शोधार्थियों और युवा रचनाकारों के लिए प्रेरणास्थली बन रहा है।
भ्रमण के दौरान प्रो. सुरेश और डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के बीच लेखक गांव और इंडिया हैबिटेट सेंटर के बीच सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। प्रो. सुरेश ने दोनों संस्थानों के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) का प्रस्ताव रखते हुए कहा कि इससे साहित्य, संस्कृति, शोध, संवाद, प्रकाशन और युवा रचनाकारों के प्रशिक्षण को नई दिशा मिलेगी।
उन्होंने विश्वास जताया कि यह संभावित सहयोग देशभर के साहित्यकारों, कलाकारों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए नए अवसर खोलेगा और भारतीय सांस्कृतिक चेतना को मजबूती देगा।
इस अवसर पर डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा कि लेखक गांव का उद्देश्य साहित्य, संस्कृति, शिक्षा और मानवीय मूल्यों को एक मंच पर लाना है। इंडिया हैबिटेट सेंटर जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के साथ सहयोग से लेखक गांव की राष्ट्रीय पहचान और वैचारिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

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