बीमारी से जंग के बीच प्रेम और विश्वास की मिसाल बनीं। कविता मनवाल (सप्ताह में तीन दिन डायलिसिस कराने की चुनौती के बीच भी नहीं टूटी आस्था की डोर, 2023 से लगातार डायलिसिस के बावजूद रखा करवा चौथ का व्रत)
डोईवाला (राजेंद्र वर्मा):
जिंदगी की मुश्किलें इंसान के हौसले को जरूर परखती हैं, लेकिन जब अपनों के प्रति प्रेम और मन में अटूट आस्था हो तो कठिन परिस्थितियां भी संकल्प को डिगा नहीं पातीं। डोईवाला की 34 वर्षीय कविता मनवाल वर्ष 2023 से लगातार डायलिसिस करा रही हैं।
सप्ताह में तीन दिन डायलिसिस की चुनौती का सामना करने के बावजूद उन्होंने करवा चौथ का व्रत रखकर पति के प्रति प्रेम, परिवार के प्रति समर्पण और अटूट विश्वास की मिसाल पेश की।
करवा चौथ सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखने वाला पर्व है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं। कविता मनवाल के लिए भी यह पर्व बेहद खास है। स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के बावजूद उन्होंने अपनी परंपरा और विश्वास को कायम रखा। उनके लिए करवा चौथ केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि पति और परिवार के प्रति प्रेम और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक है।
कविता ने बताया कि करवा चौथ का पर्व साल में एक बार आता है और वह इस व्रत को नहीं छोड़तीं। वह होई माता का व्रत भी पूरी श्रद्धा के साथ रखती हैं। पति और बच्चों की अच्छी सेहत, सुख-समृद्धि और लंबी उम्र की कामना करना उनके लिए सबसे बड़ी खुशी है।
वर्ष 2023 से लगातार डायलिसिस कराने के बावजूद कविता का अपने परिवार के प्रति प्रेम और आस्था कायम है। उनकी कहानी बताती है कि जिंदगी की कठिन परिस्थितियों के बीच भी अपनों के लिए जीने का जज्बा इंसान को हिम्मत देता है। कविता का यह संकल्प न केवल उनके हौसले को दर्शाता है, बल्कि प्रेम, विश्वास और पारिवारिक रिश्तों की अहमियत भी बयां करता है।



